राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि रबी सीजन के दौरान बोए गए गेहूं के 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में जलवायु-अनुकूल किस्में उगाई गई हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने विभिन्न मौसम स्थितियों के अनुकूल 114 किस्में विकसित की हैं, जो बढ़ते तापमान के बावजूद उपज में वृद्धि करती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का गेहूं उत्पादन 2024-25 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में रिकॉर्ड 1154.30 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 1132.92 लाख टन था।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने गेहूं पर अपने अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के माध्यम से पिछले 15 वर्षों के दौरान 114 किस्में विकसित की हैं जो अलग-अलग मौसम स्थितियों के अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि 2024-25 के दौरान देश में बोए जाने वाले कुल गेहूं क्षेत्र में से 60 प्रतिशत से अधिक गेहूं क्षेत्र जलवायु अनुकूल किस्मों के अंतर्गत है।
जलवायु अनुकूल ये किस्में तनावपूर्ण वातावरण में उपज में कम कमी दिखाती हैं। उन्होंने मार्च में बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे उपायों के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
मंत्री ने कहा कि गेहूँ की किस्मों जैसे DBW187, DBW303, DBW327, WH1270, PBW872 को अक्टूबर में बोने के लिए विकसित और अधिसूचित किया गया है और बोने के कार्यक्रम को संशोधित करने से अनाज को अपेक्षाकृत कम तापमान पर भरने की अनुमति मिली है और गेहूं को गर्मी के तनाव से बचाया जा सका है, जिससे उपज में वृद्धि हुई है।
इसके अलावा, आईसीएआर-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल मौसम की स्थिति पर नजर रख रहा है और किसानों को सलाह जारी कर रहा है, जिससे उन्हें तापमान बढ़ने की स्थिति में सुरक्षात्मक उपाय लागू करने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, IIWBR उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के बीजों की प्रजनक बीज आपूर्ति और किसानों को सीधे बीज वितरण में भी शामिल है।