दिल्ली की ग़ाज़ीपुर मंडी में इस सर्दी प्याज़ के दाम रिकॉर्ड स्तर तक गिर गए हैं। निर्यात पर जारी रोक के कारण घरेलू बाज़ार में आपूर्ति बढ़ गई है, जिससे प्याज़ की कीमतें लागत मूल्य से भी नीचे पहुँच गईं। सैकड़ों किसान और व्यापारी घाटे में हैं और बेचने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा।
ग़ाज़ीपुर मंडी के प्याज़ व्यापारी परमानंद सैनी के अनुसार, मंडी में नासिक, अलवर, मध्यप्रदेश, बेंगलुरु समेत कई राज्यों से भारी मात्रा में प्याज़ आ रहा है। उन्होंने बताया —
“निर्यात बंद होने की वजह से ग़ाज़ीपुर मंडी में प्याज़ का थोक भाव सिर्फ ₹2 प्रति किलो से ₹13 प्रति किलो तक है। इतने दाम से किसान उत्पादन लागत भी नहीं निकाल पा रहे।”
सैनी ने कहा कि 50 किलो प्याज़ की बोरी की कीमत सिर्फ ₹100–₹120 पड़ रही है, जबकि इस दर पर किसान कमीशन और खेती में लगाए गए पैसे भी वापस नहीं ला पा रहे।
“स्टॉक बढ़ रहा, नुकसान और बढ़ा रहा” — व्यापारी
एक अन्य व्यापारी सुच्छा सिंह ने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियाँ भी पहले से जमा प्याज़ बाजार में छोड़ रही हैं, जबकि इस समय उत्पादन पहले से अधिक है।
उन्होंने कहा —
“सीमा बंद है, निर्यात नहीं हो रहा। माल मंडियों में जमा हो रहा है। किसान भी परेशान हैं और हम भी, क्योंकि माल खरीदने के बाद लौटाया नहीं जा सकता।”
विशेषज्ञों ने दिए समाधान — बाजार विविधीकरण और स्टॉक सीमा का सुझाव
कमोडिटी निर्यात और विदेशी व्यापार विशेषज्ञ लोकेश गुप्ता ने कहा कि निर्यात बंद होने पर पूरा दबाव घरेलू बाजार पर आ जाता है, जिससे कीमतें गिरती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को निजी व सरकारी दोनों एजेंसियों पर स्टॉक सीमा तय करनी चाहिए, ताकि जमाखोरी रुके और कीमतें स्थिर रहें।
गुप्ता ने कहा —
“निर्यात प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि यदि एक देश बंद करे तो हम दूसरा बाजार तुरंत पकड़ सकें। इससे किसानों को नुकसान नहीं होगा।”
उन्होंने NAFED को विदेशों में शाखाएँ खोलने की सलाह दी ताकि भारत के प्याज़ को ग्लोबल मार्केट में बेहतर कीमत मिल सके। उनके अनुसार, बांग्लादेश भारत के प्याज़ निर्यात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खरीदता था, लेकिन अब आयात रोकने से बाज़ार सिकुड़ गया है। वहीं सऊदी अरब ने भी लगभग एक साल से खरीद कम कर दी है।
निर्यात रोक का व्यापक प्रभाव
भारत ने अगस्त 2023 से अप्रैल 2025 के बीच प्याज़ निर्यात पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इससे पहले भी सितंबर 2019 और सितंबर 2020 में छह महीने का पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। दूसरी ओर,
•बांग्लादेश स्थानीय उत्पादन बचाने के लिए भारतीय प्याज़ नहीं खरीद रहा,
•और सऊदी अरब अब यमन और ईरान से प्याज़ आयात कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात रास्ते नहीं खोले गए और बाज़ार नहीं बढ़ाया गया तो किसानों की स्थिति और बिगड़ सकती है।