नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगस्त और अगस्त-सितंबर अवधि के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान जताया है। हालांकि, विभाग ने पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर) के लिए पहले जारी किए गए सामान्य वर्षा के 90 प्रतिशत के अनुमान को बरकरार रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश नियमित अंतराल पर होती रही, तो वर्षा की मात्रा कुछ कम रहने के बावजूद खरीफ फसलों पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
IMD के अनुसार, अगस्त-सितंबर के दौरान वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 93 प्रतिशत रहने की संभावना है। सामान्यतः इस अवधि में 422.8 मिमी वर्षा होती है, जबकि इस वर्ष करीब 393 मिमी वर्षा होने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि सबसे खराब स्थिति में भी वर्षा 84 प्रतिशत से कम रहने की संभावना नहीं है।
जून-जुलाई में 13 प्रतिशत कम बारिश
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून और जुलाई के दौरान देश में 389.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य 445.8 मिमी की तुलना में 87 प्रतिशत रही। यानी मानसून के पहले दो महीनों में देश में 13 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
71 प्रतिशत क्षेत्र में पूरी हो चुकी है खरीफ बुवाई
कृषि क्षेत्र के लिए राहत की बात यह है कि 24 जुलाई तक किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई सामान्य क्षेत्रफल के 71 प्रतिशत हिस्से में पूरी कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में नियमित बारिश होती रही, तो कम वर्षा के बावजूद फसलों की वृद्धि पर अधिक प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सितंबर में मजबूत हो सकता है एल नीनो
IMD के महानिदेशक एम. मोहापात्रा ने बताया कि अगस्त में मध्यम स्तर का एल नीनो बना रह सकता है, जबकि सितंबर तक इसके मजबूत (Strong El Niño) होने की संभावना है। एल नीनो का प्रभाव सामान्यतः भारतीय मानसून को कमजोर करता है और वर्षा में कमी ला सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के सकारात्मक होने की संभावना है। सकारात्मक IOD आमतौर पर मानसून के लिए अनुकूल माना जाता है और यह एल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है।
किन राज्यों में अच्छी बारिश की संभावना
IMD के अनुसार अगस्त में तटीय तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, दक्षिण-पश्चिम ओडिशा, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से, विदर्भ, मराठवाड़ा, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, तटीय पश्चिम बंगाल और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।
वहीं, देश के अधिकांश अन्य हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, जो देश का प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक क्षेत्र है, वहां व्यापक सिंचाई सुविधाओं के कारण फसलों पर वर्षा की कमी का असर सीमित रहने की उम्मीद है।
जुलाई में बने 24 लो-प्रेशर सिस्टम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जुलाई के दौरान 24 लो-प्रेशर सिस्टम बने, जो वर्ष 2017 के बाद सबसे अधिक हैं। इन्हीं प्रणालियों के कारण जुलाई के वर्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से अगस्त के वर्षा पूर्वानुमान को लेकर अभी पूरी तरह निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
किसानों के लिए राहत की उम्मीद
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगस्त और सितंबर में बारिश का वितरण संतुलित रहता है, तो वर्षा में हल्की कमी के बावजूद धान, दलहन, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। वहीं, सितंबर में सकारात्मक IOD की स्थिति बनने पर मानसून को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद भी बनी हुई है।