केंद्र सरकार के डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्री स्टैक परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में सोनीपत जिले में बड़ा कदम उठाया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जिले के 11 गांवों का चयन किया गया है, जहां विशेष कैंप आयोजित कर किसानों की यूनिक डिजिटल आईडी तैयार की जाएगी। इससे कृषि से जुड़ा प्रमाणिक और रियल टाइम डेटा उपलब्ध हो सकेगा, जो भविष्य में योजनाओं और सेवाओं को और प्रभावी बनाएगा।
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्री स्टैक डीपीआई को राज्यों के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। यह एक ओपन सोर्स, इंटर-ऑपरेबल और ओपन एपीआई आधारित प्रणाली है, जिसके माध्यम से कृषि क्षेत्र से संबंधित सुरक्षित, प्रमाणित और सहमति-आधारित डेटा साझा किया जाएगा।
किसान रजिस्ट्री और फसल का रियल टाइम रिकॉर्ड
परियोजना के अंतर्गत राजस्व विभाग के सहयोग से किसान रजिस्ट्री तैयार की जाएगी, जिससे प्रत्येक किसान की प्रमाणित और गतिशील पहचान सुनिश्चित होगी। साथ ही गांवों की डिजिटल मैपिंग कर स्थान की सटीकता बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा फसल बिजाई रजिस्ट्री के माध्यम से बोई गई फसलों का रियल टाइम डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा।
इन 11 गांवों का हुआ चयन
पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले की विभिन्न तहसीलों से गांवों का चयन किया गया है।
•सोनीपत तहसील: नसीरपुर बांगर, जगदीशपुर
•गन्नौर: जफरपुर, डबरपुर
•गोहाना: सिवानका, गंगेसर
•खरखौदा: खुर्मपुर, छिनौली
•राई ब्लॉक: भैरा, बांकीपुर
•खानपुर कलां सब-तहसील: बादोटी खास
पटवारियों की ड्यूटी तय, लगेंगे विशेष कैंप
परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए चयनित गांवों में पटवारियों की तैनाती कर दी गई है। इस मिशन में राजस्व विभाग मुख्य क्रियान्वयन एजेंसी होगा, जबकि कृषि निदेशक को नोडल अधिकारी बनाया गया है। गांवों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे और मास्टर ट्रेनर्स को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसान रजिस्ट्री से संबंधित डेटा 3 से 10 दिनों के भीतर साझा किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से मिलेगा और कृषि क्षेत्र में तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।