नगालैंड में जूट और नए प्राकृतिक रेशों की खेती को बढ़ावा देने के लिए चार पक्षों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह MoU 2025-26 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए मान्य रहेगा।
शुक्रवार (26 सितंबर 2025) को कोहिमा में हुए इस समझौते पर हस्ताक्षर नेशनल जूट बोर्ड (NJB), जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (JCI), आईसीएआर – सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर जूट एंड अलाइड फाइबर्स (ICAR-CRIJAF) और नगालैंड सरकार के कृषि विभाग के बीच हुए।
समारोह की अध्यक्षता नगालैंड के कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) वेज़ोपे केनये ने की। इस अवसर पर संज़ूजो नियेनू (निदेशक, कृषि), पद्मिनी सिंगहा (संयुक्त सचिव, केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय), महादेव दत्ता (हेड टेक्निकल, NJB), कौशिक रक्षित (डायरेक्टर फाइनेंस, JCI) सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस समझौते का उद्देश्य नगालैंड में जूट की खेती का विस्तार करना, बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाना और फ्लैक्स, रेमी और सिसल जैसे नए प्राकृतिक रेशों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करना है।
समझौते के तहत किसानों को वैकल्पिक नकदी फसलें, अधिक आय और सतत आजीविका के अवसर प्रदान करने का लक्ष्य है। अधिकारियों ने बताया कि जूट बायोडिग्रेडेबल, नवीकरणीय और पर्यावरण-अनुकूल है, जो प्लास्टिक और लकड़ी के विकल्प के रूप में बड़ी क्षमता रखता है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा जूट और जूट उत्पादक देश है, लेकिन अब तक जूट बोरे के सरकारी आपूर्ति पर अधिक निर्भरता है और विविधीकरण पर कम ध्यान दिया गया है। यह MoU नगालैंड में नई औद्योगिक संभावनाएं खोलने और वैल्यू-एडेड फाइबर उत्पादन को बढ़ावा देने की उम्मीद जगाता है।