देश के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर कीमतों की मार साफ दिखाई दे रही है। अक्टूबर में खरीफ फसलों की कटाई शुरू होते ही ज्यादातर फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बिकने लगी हैं। सरकारी खरीद सीमित रहने और आयात बढ़ने से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, नौ प्रमुख खरीफ फसलों — उड़द, तूर, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली, मक्का, बाजरा, ज्वार और धान — की औसत मंडी कीमतें MSP से कम रहीं। इनमें से सात फसलों की कीमतें पिछले साल की तुलना में 3 से 32 प्रतिशत तक कम दर्ज की गईं

तिलहन और दालें सबसे बड़ी मार झेल रहीं

तिलहन उत्पादक किसानों के लिए यह सीजन बेहद कठिन रहा है। सोयाबीन और मूंगफली MSP से करीब 26% नीचे बिकीं, जबकि तूर, मूंग और उड़द के दाम 17–25% कम रहे।
“MSP पहले से ही ऊंचा है और पिछले दो साल से आयात बहुत बढ़ गया है। जब तक आयात शुल्क नहीं बढ़ाया जाता, बाजार भाव MSP के स्तर तक नहीं पहुंच सकते,” पूर्व कृषि मूल्य आयोग (CACP) के अध्यक्ष अशोक गुलाटी ने कहा।

अनाजों में, मक्का का औसत भाव ₹2,400 प्रति क्विंटल के MSP से 24% कम रहा, जबकि बाजरे का भाव ₹2,775 के MSP से 23% कम रहा। केवल धान ऐसी फसल रही जिसकी औसत कीमत MSP से करीब-करीब बराबर रही।
सरकार ने इस बार अब तक 119 लाख टन (चावल के रूप में) से अधिक धान खरीदा है, जो पिछले साल की तुलना में 46% ज्यादा है।⸻

कीमतें गिरने के पीछे कारण

विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिक वर्षा से उत्पादन बढ़ने और कम आयात शुल्क के चलते सस्ते आयात बढ़ने से बाजार में आपूर्ति मांग से ज्यादा हो गई है। इससे किसानों की फसलें औने-पौने दाम पर बिक रही हैं।

तूर की कीमतों में कुछ सुधार संभव

I-Grain के राहुल चौहान के अनुसार, “कर्नाटक और महाराष्ट्र में भारी बारिश से तूर की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे आने वाले समय में दाम बढ़ सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि हालांकि म्यांमार में उड़द का अच्छा उत्पादन हुआ है और मार्च 2026 तक वहां की नई फसल आने की संभावना है, इसलिए उड़द के दाम पर दबाव बना रहेगा।

सरकारी दखल का इंतज़ार

केंद्र सरकार ने सितंबर में कुछ राज्यों में दालों और तिलहनों की खरीद की मंजूरी दी थी, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में कितनी खरीद हुई है।
खरीफ उत्पादन के पहले अग्रिम अनुमान भी अगले सप्ताह जारी होने की संभावना है।

जब तक सरकार खरीद अभियान तेज नहीं करती और आयात पर नियंत्रण नहीं लगाती, तब तक किसानों के लिए यह खरीफ सीजन नुकसान भरा सौदा ही बना रहेगा।