भारत और रूस के बीच ऊर्जा और खाद्य तेल व्यापार लगातार मजबूत होता जा रहा है। भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह दावा करते रहे हों कि भारत रूस से तेल खरीदना कम कर रहा है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। भारत ने न केवल रूसी क्रूड ऑयल की खरीद जारी रखी है, बल्कि अब रूस से सूरजमुखी तेल (Sunflower Oil) का आयात भी कई गुना बढ़ गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में भारत का रूस से सूरजमुखी तेल आयात 12 गुना बढ़ा है। वर्ष 2021 में जहां भारत ने रूस से लगभग 1.75 लाख टन सूरजमुखी तेल खरीदा था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 20.9 लाख टन तक पहुंच गया। इस वृद्धि के साथ रूस ने यूक्रेन को पछाड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा सूरजमुखी तेल सप्लायर बनने का गौरव हासिल किया है।
भारत में सूरजमुखी तेल की बड़ी खपत
भारत में सूरजमुखी तेल सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले तीन प्रमुख खाद्य तेलों में से एक है। लेकिन घरेलू उत्पादन इसकी कुल मांग का मात्र 5% से भी कम है। ऐसे में रूस भारत के लिए एक विश्वसनीय और स्थायी आपूर्ति स्रोत बन गया है।
क्यों रूस बना बेहतर सप्लायर?
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से यूक्रेन का अधिकांश सूरजमुखी तेल यूरोप भेजा जा रहा है, जबकि रूस के पास अपने समुद्री बंदरगाहों से भारत को आपूर्ति करने का आसान मार्ग है। वहीं, यूक्रेन को सड़क और रेल मार्ग से यूरोप को तेल भेजना पड़ रहा है, जिससे उसकी लागत काफी बढ़ गई।
इस बीच, रूस अपनी विशाल फसल के कारण भारत को किफायती दरों पर सूरजमुखी तेल उपलब्ध करा पा रहा है।
रूस की हिस्सेदारी में बड़ा इजाफा
2021 में भारत के सूरजमुखी तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 10% थी, जो 2024 में बढ़कर 56% तक पहुंच गई। इससे भारत की तेल निर्भरता का नया संतुलन रूस की ओर झुक गया है।
भारत की खाद्य तेल निर्भरता
भारत अपनी कुल खाद्य तेल की मांग का लगभग 60% आयात के माध्यम से पूरा करता है।
•पाम ऑयल की हिस्सेदारी लगभग 50%
•सोयाबीन तेल दूसरे स्थान पर
•सूरजमुखी तेल तीसरे स्थान पर
1990 के दशक में सस्ते आयात के चलते भारतीय किसानों ने सूरजमुखी की खेती कम कर दी थी, लेकिन 2023-24 में जब सूरजमुखी तेल पाम ऑयल से भी सस्ता हो गया, तब इसकी मांग तेजी से बढ़ी। हालांकि, 2025 में इसके दामों में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
🇮🇳 भारत-रूस की बढ़ती नजदीकी
हाल ही में रूस और भारत के उद्योग प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे के देशों का दौरा किया है, ताकि सप्लाई चेन को और मजबूत किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति में रूस भारत का रणनीतिक और आर्थिक रूप से भरोसेमंद साझेदार बन गया है।