केंद्र सरकार ने दालों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आयात नियमों को एक साल और बढ़ाया, येलो पीज़ पर 30% शुल्क बरकरार
नई दिल्ली, मार्च 2026: देश में दालों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने तूर (अरहर), उड़द और येलो पीज़ की आयात नीति को 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है। सरकार के इस फैसले के तहत तूर और उड़द का आयात पहले की तरह पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहेगा, जबकि येलो पीज़ पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क जारी रखा गया है।
सरकार के इस कदम को दाल बाजार के लिए राहतभरा माना जा रहा है। व्यापार जगत का कहना है कि आयात नीति में एक साल की बढ़ोतरी से उद्योग को लंबी अवधि की स्पष्टता मिलेगी, जिससे आयातक, प्रोसेसर और थोक व्यापारी अपनी खरीद और सप्लाई रणनीति बेहतर ढंग से तय कर सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार देश में तूर और उड़द की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, लेकिन मौसम, बुवाई क्षेत्र और उत्पादन में उतार-चढ़ाव के कारण घरेलू आपूर्ति कई बार प्रभावित होती है। ऐसे में शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी और खुदरा कीमतों पर दबाव कम होगा। इससे उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, येलो पीज़ पर 30 प्रतिशत शुल्क बनाए रखने का फैसला घरेलू किसानों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया माना जा रहा है। अधिक आयात से स्थानीय बाजार में कीमतें कमजोर पड़ सकती थीं, इसलिए सरकार ने यह संतुलन बनाए रखा है ताकि किसानों को बेहतर भाव मिल सके।
ट्रेड सूत्रों का अनुमान है कि 2026-27 सीजन में भारत का कुल दाल आयात 50 लाख टन से अधिक रह सकता है। कनाडा, रूस, म्यांमार और मोजाम्बिक जैसे देशों से बड़ी मात्रा में तूर, उड़द और येलो पीज़ की आपूर्ति होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला खाद्य सुरक्षा, महंगाई नियंत्रण और दालों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले महीनों में अगर घरेलू उत्पादन कमजोर रहता है तो यह आयात नीति बाजार को स्थिर बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।