नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर बड़ा अनुमान जारी किया है। विभाग के मुताबिक इस साल देश में मानसून “सामान्य से कम” रह सकता है और यह 92% लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के आसपास रहने की संभावना है।
अगर यह पूर्वानुमान सही साबित होता है, तो 2023 के बाद पहली बार भारत में मानसून ‘below normal’ श्रेणी में आएगा।
एल नीनो का असर
IMD के अनुसार जून से सितंबर के बीच El Niño की स्थिति बनने की संभावना है, जो मानसून को कमजोर कर सकती है।
हालांकि, सीजन के अंत में Indian Ocean Dipole के पॉजिटिव होने की संभावना जताई गई है, जिससे कुछ हद तक बारिश में सुधार हो सकता है।
कितनी हो सकती है बारिश?.
IMD के अनुसार:
- LPA (औसत) = 87 सेमी
- अनुमानित वर्षा = लगभग 80.04 सेमी
- 90–95% LPA = ‘below normal’ श्रेणी
बारिश की संभावना का अनुमान
IMD ने विभिन्न स्थितियों की संभावना भी बताई है:
- 35% संभावना: ‘deficient’ (90% से कम)
- 31% संभावना: ‘below normal’ (90–95%)
- 34% संभावना: सामान्य या उससे अधिक
किन क्षेत्रों में असर ज्यादा?
देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना है, जबकि पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति रह सकती है।
खेती और अर्थव्यवस्था पर असर
भारत में सालाना बारिश का 70% से ज्यादा हिस्सा मानसून से आता है, इसलिए इसका सीधा असर खेती पर पड़ता है।
- दलहन और तिलहन फसलें सबसे ज्यादा जोखिम में
- उत्पादन घटने पर आयात बढ़ सकता है
- खाद्य महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर असर संभव
हालांकि, पिछले आंकड़े बताते हैं कि ‘below normal’ मानसून का मतलब हमेशा कम उत्पादन नहीं होता, अगर बारिश का समय और वितरण संतुलित रहे।
सिंचाई कवरेज में सुधार
पिछले कुछ वर्षों में सिंचाई का दायरा बढ़ा है:
- FY16: 49.3%
- FY21: 55%
फिर भी देश की खेती अभी भी काफी हद तक मानसून पर निर्भर है।
अन्य कारक भी महत्वपूर्ण
IMD ने बताया कि उत्तरी गोलार्ध में जनवरी से मार्च के बीच बर्फ का स्तर सामान्य से थोड़ा कम रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बर्फ का कम स्तर और भारतीय मानसून के बीच उल्टा संबंध होता है, जो मानसून को प्रभावित कर सकता है।
किसानों के लिए अहम होगा प्रबंधन
एम के धनुका, चेयरमैन, धनुका एग्रीटेक लिमिटेड के अनुसार, इस साल खेती में योजना और रणनीति बेहद महत्वपूर्ण होगी।
धान, कपास, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों के लिए बारिश का समय और वितरण निर्णायक साबित होगा।
आगे क्या?
IMD मई के आखिरी सप्ताह में मानसून का अपडेटेड पूर्वानुमान जारी करेगा, जिसमें मानसून के आगमन (onset) की तारीख भी बताई जाएगी।