भारत की कृषि अब केवल देश की खाद्य आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह अब एक सशक्त कूटनीतिक साधन (Foreign Policy Instrument) बनकर उभर रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, और सप्लाई चेन संकटों के बीच भारत अपनी कृषि शक्ति का इस्तेमाल नए गठबंधन बनाने, व्यापारिक लाभ सुनिश्चित करने और अपनी वैश्विक भूमिका को मजबूत करने में कर रहा है।
भारत की कृषि नीति अब कूटनीति, निवेश और तकनीक के साथ एकीकृत रूप ले चुकी है — जो इसे एक वैश्विक रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।
“फूड डिप्लोमेसी” से बढ़ी भारत की वैश्विक साख
भारत ने अपनी कृषि उत्पादकता को “फूड डिप्लोमेसी” के माध्यम से मानवीय और कूटनीतिक दोनों रूपों में इस्तेमाल किया है।
•2022 के गेहूं संकट के दौरान, भारत ने अपने “Neighbourhood First Policy” के तहत मित्र देशों के लिए निर्यात पर प्रतिबंध से विशेष छूट दी।
•मिस्र को 61,500 मीट्रिक टन गेहूं का निजी निर्यात अनुमति दी गई।
•अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं मानवीय सहायता के रूप में भेजा गया।
इस तरह की रणनीतिक मदद ने भारत की छवि को जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में सशक्त किया और क्षेत्रीय स्थिरता व सद्भावना को बढ़ावा दिया।
नए कृषि गठबंधन और व्यापारिक साझेदारियां
भारत अब अपनी कृषि ताकत का उपयोग रणनीतिक साझेदारी और व्यापारिक विस्तार के लिए कर रहा है।
•India–Middle East Food Corridor के तहत पश्चिम एशिया से नए खाद्य सुरक्षा नेटवर्क बनाए जा रहे हैं।
•फर्टिलाइजर सोर्सेज का विविधीकरण भारत को आयात पर निर्भरता घटाने में मदद कर रहा है।
•नए बाजारों तक पहुंच बनाकर भारत वैश्विक कृषि आपूर्ति शृंखला का अहम केंद्र बन रहा है।
India–UAE फूड सुरक्षा साझेदारी: एक मॉडल उदाहरण
भारत–यूएई साझेदारी इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि कृषि सहयोग कैसे विदेश नीति को सुदृढ़ बना सकता है।
•I2U2 फ्रेमवर्क (2022) के तहत, यूएई ने भारत में 2 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश कर इंटीग्रेटेड फूड पार्क बनाने की घोषणा की।
•महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स में निवेश की योजनाएं तैयार हैं।
•Agriota डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय किसानों को सीधे यूएई के बाजारों से जोड़ा जा रहा है।
यह मॉडल कृषि सहयोग को आर्थिक और रणनीतिक कूटनीति के रूप में स्थापित कर रहा है।
मोटे अनाज (Millets) के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2023 को “अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष” घोषित किया जाना भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता रही। इससे भारत को वैश्विक खाद्य सुरक्षा समाधान में एक अग्रणी देश के रूप में पहचान मिली है।
भारत अब अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर सतत कृषि और पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है।
महासागरीय और महाद्वीपीय रणनीति: कृषि व्यापार के नए मार्ग
भारत की लंबी समुद्री तटरेखा और अनेक बंदरगाह उसे पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप से सीधे जोड़ते हैं।
•चाबहार पोर्ट के जरिए भारत को मध्य एशिया तक पहुंच मिलती है, जिससे पाकिस्तान को बायपास करते हुए ऊर्जा और व्यापारिक सहयोग के नए रास्ते खुलते हैं।
•पूर्वी तट के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के बाजारों तक भारत की सीधी पहुंच है।
भविष्य की दिशा: प्रतिक्रियात्मक नहीं, रणनीतिक दृष्टिकोण आवश्यक
हालांकि भारत की कृषि कूटनीति अब तक सफल रही है, लेकिन अचानक निर्यात प्रतिबंधों जैसी नीतिगत अस्थिरताएं इसकी विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।
भारत को अब अपनी नीति को प्रतिक्रियात्मक से रणनीतिक (Reactive to Proactive) बनाना होगा। इसके लिए आवश्यक कदम —
•वैल्यू एडिशन और निर्यात विविधीकरण में निवेश
•कृषि अवसंरचना को सुदृढ़ करना
•कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करना
•नीतिगत निरंतरता बनाए रखना
इन कदमों से भारत की कृषि न केवल घरेलू शक्ति के रूप में, बल्कि एक वैश्विक रणनीतिक साधन के रूप में उभरेगी — जो उसकी भूराजनीतिक और आर्थिक आकांक्षाओं को सशक्त बनाएगी।