भारतीय सूक्ष्म उर्वरक निर्माता संघ (IMMA) द्वारा सभी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को समान वस्तु एवं सेवा कर (GST) स्लैब के अंतर्गत लाने की मांग पर केंद्र सरकार ने विचार करने का आश्वासन दिया है। वित्त मंत्रालय इस मुद्दे पर कृषि मंत्रालय से परामर्श कर आगे की कार्रवाई करेगा।

दिल्ली में 12 सितंबर को IMMA के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अधिकारियों से मुलाकात की। संघ ने मांग की कि आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) और उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) के तहत आने वाले सभी उर्वरकों—माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, उनके मिश्रणों और गैर-सब्सिडी ग्रेड सहित—को 5% GST स्लैब में ही रखा जाए।

उल्टे कर ढांचे पर चिंता व्यक्त

अधिकारियों ने उद्योग द्वारा उठाई गई उल्टे कर ढांचे (inverted duty structure) की चिंता को स्वीकार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि जब तक कई GST दरें लागू हैं, तब तक यह समस्या बनी रह सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्टॉक-इन-ट्रेड पर GST रिफंड कानून के अनुसार संभव नहीं है और डीलरों को ऐसे GST को भविष्य की कर देनदारी के विरुद्ध समायोजित करना चाहिए।

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के चलते निर्माताओं को इनपुट पर 18% GST देने की समस्या पर अधिकारियों ने सहानुभूति जताई और आश्वासन दिया कि GST 2.0 के साथ तेज़ रिफंड के लिए अधिसूचना जारी की जाएगी।

उद्योग ने राहत की मांग की

IMMA ने चेतावनी दी कि उर्वरकों को 18% GST स्लैब में ले जाने से किसानों के लिए कीमतें बढ़ेंगी, कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ेगा और निर्माताओं तथा किसानों—दोनों को नुकसान होगा। संघ ने संचयित कर क्रेडिट के त्वरित रिफंड की मांग करते हुए 30 दिन की समयबद्ध रिफंड व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।

संघ ने सरकार को आश्वस्त किया कि यदि कर में राहत दी जाती है तो उद्योग किसी भी प्रकार के मुनाफाखोरी में शामिल नहीं होगा और कर लाभ का सीधा फायदा किसानों को या तो कीमत घटाकर या वर्तमान MRP बनाए रखकर दिया जाएगा।