केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि उत्पादों की आयात नीति ऐसी होनी चाहिए, जो किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों का संतुलन बनाए रखे। उन्होंने चेताया कि वर्तमान जैसी स्थिति, जब कम घरेलू कीमतों के कारण किसानों की आय पर असर पड़ता है, बार-बार नहीं आने दी जानी चाहिए।
इंडियन एक्सप्रेस आइडिया एक्सचेंज कार्यक्रम में चौहान ने कहा, “हम ऐसी नीति अपनाते हैं जिससे दालों और तिलहन जैसी वस्तुओं की कीमतें इतनी न बढ़ें कि आम नागरिक उन्हें खरीद न सके। लेकिन जब घरेलू उत्पादन प्रभावित होता है, हम सस्ते आयात की ओर बढ़ते हैं।”
आयात बढ़ने से घरेलू कीमतों पर दबाव
चौहान ने माना कि जब आयात तेज़ी से बढ़ता है, तो घरेलू बाज़ार में कीमतें गिरती हैं, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
दालों की कीमतें गिरने से रोकने की रणनीति
दालों के दाम और न गिरें, इसके लिए सरकार ने हाल ही में
•पीली मटर पर 30% आयात शुल्क लगाया है,
•दालों की अन्य किस्मों पर भी शुल्क बढ़ाया है,
•वहीं चावल पर निर्यात प्रतिबंध हटाया गया है और
•प्याज़ पर निर्यात शुल्क समाप्त किया गया है।
चौहान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसान अधिक मात्रा में दाल और तिलहन का उत्पादन करें ताकि आयात पर निर्भरता कम हो। इसके लिए पिछले वर्ष से सरकार तूर, उड़द, मसूर और तिलहन — सोयाबीन, मूंगफली, सरसों की “100% खरीद” की गारंटी दे रही है, यदि आवश्यकता पड़े।
खाद्य मुद्रास्फीति लगातार पाँचवें महीने नकारात्मक
अक्टूबर महीने में खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति (-) 5.02% रही, जो लगातार पाँचवाँ महीना है जब यह नकारात्मक क्षेत्र में बनी हुई है। सब्ज़ियों, अनाज, दालों, मांस, अंडे और मसालों की नरम कीमतों ने कुल महंगाई पर नियंत्रण रखा।
भौतिक खरीद और ‘भावांतर’ मॉडल की वकालत
मंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि वे भावांतर जैसे मूल्य अंतर भरपाई मॉडल अपनाएँ, जैसा मध्य प्रदेश में चलाया जाता है। इस योजना में सरकार किसानों को बाजार मूल्य और MSP के अंतर का भुगतान करती है।
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में 24 अक्टूबर को 6 लाख सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना लागू की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई कृषि उत्पादों की कम मंडी कीमतों और अधिकांश वस्तुओं के MSP से नीचे व्यापार होने की वजह से दालों और अनाज की मुद्रास्फीति भी नियंत्रित रहने में मदद मिली है।