महाकुम्भ के दिव्य और भव्य आयोजन से भारत ही नहीं विदेश में भी लोगों में बड़ा उत्साह है। तुर्की की रहने वाली पिनार महाकुम्भ में पहली बार भारत की संस्कृति और परंपराओं से परिचित होने संगम पहुंची हैं। पिनार ने संगम में गंगा स्नान कर तिलक लगाया और सनातन धर्म की राह पर निकल पड़ी।
पिनार ने बताया कि उन्होंने महाकुम्भ के बारे में अपने दोस्तों से सुना था और भारत आकर इसे देखने की इच्छा लंबे समय से थी। भारतीय संस्कृति से प्रभावित पिनार ने कहा कि यहां महाकुम्भ का माहौल बड़ा दिव्य और भव्य है। गंगा स्नान और संगम की रेत पर चलने का अनुभव बड़ा अविस्मरणीय है।
पिनार ने पहली बार महाकुम्भ के माध्यम से इस आध्यात्मिक यात्रा को पूरा किया। उन्होंने कहा कि यहां की ऊर्जा और वातावरण उन्हें भारतीय परंपराओं की गहराई को समझने का अवसर देता है। महाकुम्भ में पिनार ने स्नान, ध्यान और तिलक लगाकर सनातन धर्म के प्रति अपने सम्मान और आस्था को व्यक्त किया।
प्रयागराज में औपचारिक रुप से महाकुंभ सोमवार (13 जनवरी) से शुरू होगा, लेकिन उससे पहले ही यहां पर बड़ी संख्या में देश विदेश से श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन शुरू हो गया है. इस का महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर कई खास इंतजाम किए गए हैं.
निरंजनी अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी महाराज ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कुंभ की महिमा का वर्णन किया. उन्होंने बताया कि 144 साल बाद पड़ रहे इस महाकुंभ के संयोग से जुड़े तथ्य और युवाओं के धार्मिक चीजों से जोड़ने की पीछे की कहानी रुचिकर है.