शहद ही नहीं अब मधुमक्खियों का ज़हर भी किसानों की बड़ी आमदनी का जरिया बना है। मधुमक्खियों का ज़हर सोनै से भी ज्यादा महंगा है। पंजाब और हरियाणा में किसानों के लिए यह लाभकारी सौदा है।

पंजाब के किसानों ने खेतीबाड़ी और दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ लाखों रुपये की कमाई का एक और तरीका तलाश कर लिया है। बठिंडा जिले में महिलाओं के दो स्वयं सहायता समूहों ने पिछले दो साल में मधुमक्खी पालन को अपनाया है। मधुमक्खी पालन में महिलाओं के समूहों ने एक नई इबारत लिखते हुए पिछले दो साल में एक टन शहद का उत्पादन कर 18 लाख रुपये की कमाई की है। अब यह महिलाएं योजना के तहत मधुमक्खियों का जहर बेचने की तैयार कर रही हैं। मधुमक्खियों का 10 ग्राम जहर बेच कर महिलाओं के समूहों को करीब एक लाख रुपये की कमाई होगी। बता दें कि मधुमक्खी का जहर दवा बनाने के काम आता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के दोनों समूहों ने पंजाब एग्रो की सहायता से 10 लाख रुपये का ऋण लिया और इसके बाद दयालपुरा भाईका गांव में मधुमक्खियों के शहद को प्रोसेस करने के लिए उच्च तकनीक का एक प्लांट लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्लांट को स्थापित करने के लिए ऋण में सरकार 35 फीसदी की सब्सिडी भी देती है. इसमें तैयार किए जाने वाले करीब डेढ़ दर्जन उत्पादों को निर्यात किए जाने की भी सफल योजना महिलाओं के समूहों के पास है। मधुमक्खी के जहर के अलावा बी पोलन हाई लेवल प्रोटीन का उत्पादन भी प्लांट में किया जाएगा इसके 10 ग्राम की कीमत भी बाजार में 1 लाख रुपये के करीब है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआत में जब इन महिलाओं ने बैंक में ऋण के लिए आवेदन किया तो इसे रद्द कर दिया गया था। बैंक का कहना था कि यह महिलाओं का काम नहीं है और इसके लिए ऋण को स्वीकृति नहीं दी जा सकती है। इसके बाद भी महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी और 10-10 बॉक्स के साथ मधुमक्खी पालन की शुरुआत की। शहद उत्पादन के बाद महिलाओं ने सरकारी विभागों को उत्पाद के गिफ्ट पैक भी भेजे। इसके बाद पंजाब स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन के तहत महिलाओं के दो स्वयं सहायता समूह तैयार किए गए। इन दोनों समूहों में 11-11 महिलाएं हैं और अब इनके साथ 300 अन्य महिलाओं को भी जोड़ने की तैयारी कर ली गई है। अब यह महिलाएं व्यापक स्तर पर शहद उत्पादन कर बड़ा मुनाफा कमाने के चक्कर में हैं. इसके लिए इनका वेरका और आजीविका कोऑपरेटिव सोसायटी के साथ अनुबंध हुआ है।

हरियाणा में भी हरियाणा में मधुमक्खी पालन अब सिर्फ शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसान बी-वेनम (मधुमक्खी के जहर) से भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। बी-वेनम की कीमत 2 हजार से 12 हजार रुपए प्रति ग्राम तक होती है, जिसका उपयोग फार्मा और कॉस्मेटिक कंपनियां दर्द निवारक दवाओं और एंटी-एजिंग क्रीम बनाने में करती हैं। देश के अलावा साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, जॉर्जिया, कुरोसिया, फ्रांस, टर्की, डेनमार्क, स्विटजरलैंड जैसे देशों में इसकी बढ़ी मांग है।
, एक जानकारी अनुसार 500 बी-बॉक्स से 75 हजार रुपए तक मासिक कमाई कर सकता है। खास बात यह है कंपनियां बी-कीपर के पास फ्री में सेटअप लगाकर बी-वेनम कलेक्ट करती हैं। किसान को केवल मधुमक्खी पालन करना होता है। इससे किसान बिना किसी अतिरिक्त खर्च के फायदा कमा सकते हैं।

हरियाणा में 30 किसान इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस नई तकनीक से मधुमक्खी पालकों की आय में इजाफा होगा और किसान की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। इसमें नेशनल बी-बोर्ड और बागवानी विभाग भी सहयोग करता है।