कभी दिल्ली में प्याज की कीमत बढ़ने पर भारतीय जनता पार्टी के नेता अपने गले में प्याज की माला पहनकर महंगाई को लेकर सड़कों पर उतर कर विरोध जताया करते थे।

अब, टमाटर के बाद प्याज के तेवर लाल हैं। प्याज के दाम पन्द्रह दिन में ही साठ प्रतिशत तक बढ़ गये हैं। नवरात्रि के बाद से प्याज की कीमत बढ़ी है और इसमें उछाल दिसंबर तक जारी रहने की संभावना है। स्टॉक में मौजूद रबी प्याज खत्म होने और खरीफ प्याज के आगमन में देरी के कारण आपूर्ति की स्थिति खराब है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने NCCF और NAFED के जरिए पांच लाख टन का ‘बफर स्टॉक’ बनाए रखा है और आने वाले दिनों में अतिरिक्त दो लाख टन प्याज खरीदने की योजना है।

प्याज की बढ़ती हुई कीमतों पर सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि बढ़ती कीमतों के पीछे कारण है कि बाजार में प्याज की कमी है। अगले महीने नवंबर-दिसंबर तक बाजार में नया माल आ जाएगा। इस बीच प्याज की कीमतें 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के आसार जताए जा रहे हैं। सरकार की कोशिशों के बाद भी प्याज के भाव कम नहीं हो रहे हैं।

प्याज की खुदरा कीमत 57 फीसदी बढ़कर 47 रुपये प्रति किलोग्राम होने के बाद केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुदरा बाजारों में 25 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर ‘बफर स्टॉक’ से प्याज की बिक्री बढ़ाने का शुक्रवार को फैसला किया। एक साल पहले इसी अवधि में प्याज 30 रुपये प्रति किलोग्राम थी। कीमतों में और वृद्धि को रोकने के लिए खुदरा बिक्री बढ़ा रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, जिन राज्यों में कीमतों में तेज वृद्धि हो रही है वहां थोक और खुदरा दोनों बाजारों में ‘बफर स्टॉक’ से प्याज दिया जा रहा है।

कुछ दिनों पहले तक दिल्ली की मंडियों में हर दिन 50 से 60 गाड़ियां महाराष्ट्रा और मध्यप्रदेश से आ रहे थे, जिनकी संख्या वर्तमान में घट कर आधी रह गयी हैं, जबकि मांग में तेजी आयी है। यही कारण है कि हर दिन प्याज की कीमतों में उछाल आ रहा है। नई फसल के आने में अभी कम से कम 20 से 25 दिनों के समय और लगेंगे, जिसके बाद ही प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगेगा. लेकिन फिलहाल लोगों को प्याज की बढ़ रही कीमत से राहत नहीं मिलने जा रही है।