राजधानी दिल्ली में जारी की गयीं 61 फसलों की 109 किस्मों में 34 खेत की फसलें और 27 बागवानी फसलें शामिल हैं। खेत की फसलों में बाजरा, चारा फसलें, तिलहन, दलहन, गन्ना, कपास, फाइबर और अन्य संभावित फसलों सहित विभिन्न अनाज के बीज जारी किए गए। वहीं, बागवानी फसलों में फलों, सब्जियों, बागानों, कंद फसलों, मसालों, फूलों और औषधीय फसलों की विभिन्न किस्में भी शामिल हैं। मिली जानकारी अनुसार इन किस्मों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने विकसित किया है और ये कुल 61 फसलों से संबंधित हैं। इनमें 34 खेतों में लगाई जाने वाली और 27 बागवानी की फसलें हैं। मोदी ने दिल्ली के पूसा परिसर में तीन प्रायोगिक कृषि भूखंडों पर बीजों को पेश किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने किसानों और वैज्ञानिकों के साथ बातचीत भी की।

प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2014 से ही किसानों की आय बढ़ाने के लिए टिकाऊ खेती के तरीकों और जलवायु अनुकूल तरीकों की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने लगातार ‘जैव-सुदृढ़’ किस्मों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है और कुपोषण से निपटने के लिए उन्हें मध्याह्न भोजन योजना और आंगनवाड़ी सेवाओं जैसी सरकारी पहलों से जोड़ा है।

गौरतलब है कि भारत सरकार पहले से ही पर्यावरण की चिंता के साथ हरित और टिकाऊ कृषि और अच्छी कृषि प्रथाओं के माध्यम से हरित कृषि को बढ़ावा दे रही है। यह राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन को लागू कर रहा है जो जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत राष्ट्रीय मिशनों में से एक है। इस मिशन का उद्देश्य भारतीय कृषि को बदलती जलवायु के प्रति अधिक लचीला बनाने के लिए रणनीतियों को विकसित और लागू करना है।