पंजाब के मानसा जिले में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय कमी आई है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, फसल कटाई के मौसम में स्टबल बर्निंग मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई—2023 में 2,253 से घटकर 2024 में 618 और 2025 में सिर्फ 306, यानी दो वर्षों में 87% की कमी।
जिले के 244 गांवों में से 104 गांवों में 2025 में एक भी पराली जलाने की घटना दर्ज नहीं हुई, जो बड़े परिवर्तन का संकेत है।
TSPL के ‘स्टबल-टू-बायोफ्यूल’ मॉडल का असर
मानसा की उपायुक्त नवजोत कौर ने कहा कि जिला प्रशासन पराली जलाने की रोकथाम को लंबे समय तक टिकाऊ मॉडल बनाने पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा—
“TSPL का 360-डिग्री अप्रोच, जिसमें पराली प्रबंधन, किसानों को भूसा बेचने का विकल्प देना और इसे स्वच्छ ऊर्जा में बदलना शामिल है, परिवर्तन में अहम भूमिका निभा रहा है।”
TSPL (Talwandi Sabo Power Limited) का सुपरक्रिटिकल प्लांट पारंपरिक बायोमास का उपयोग नहीं कर सकता, इसलिए उसे उच्च घनत्व वाले कार्बन-न्यूट्रल बायोफ्यूल की आवश्यकता होती है। बाज़ार में ऐसी सामग्री की उपलब्धता कम होने के कारण कंपनी ने अपने प्लांट के पास पंजाब की सबसे बड़ी टॉरिफाइड बायो-पेललेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (क्षमता: 500 टन प्रतिदिन) स्थापित करने में भागीदारों की मदद की।
इससे स्थानीय स्तर पर खरीदे गए धान के भूसे को उच्च गुणवत्ता वाले बायोफ्यूल में बदला जा रहा है, साथ ही किसानों के लिए निश्चित खरीद (Buy-back) का बाज़ार भी सुनिश्चित हुआ है।
बड़े पैमाने पर बायोमास सह-दहन (Co-firing)
TSPL ने 30 नवंबर 2025 तक 2,50,330 टन से अधिक बायोमास का को-फायरिंग में उपयोग किया, जिससे कंपनी ने वर्ष-प्रति-तिथि लक्ष्य का 5.07% हासिल किया है।
बढ़ते बायोमास उपयोग ने किसानों को पराली प्रबंधन के स्वच्छ तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। इससे न सिर्फ स्टबल बर्निंग में कमी आई है, बल्कि पंजाब और एनसीआर क्षेत्र में मौसमी स्मॉग और वायु गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मॉडल की सराहना
वेदांता लिमिटेड के CEO (Power) राजिंदर सिंह आहूजा ने कहा:
“धान की पराली का प्रभावी प्रबंधन पंजाब की वायु गुणवत्ता सुधार का मूल है। किसानों और वैल्यू-चेन भागीदारों के साथ काम करते हुए, TSPL ने किसानों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन पैदा किए और मानसा में दो वर्षों में 87% कमी का लक्ष्य हासिल किया। यह दिखाता है कि तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी कैसे जिला-स्तरीय परिवर्तन ला सकती है। हम इसे भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों के अनुरूप और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”