पंजाब में इस साल बासमती धान के उत्पादन और आवक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मंडियों में अब तक बासमती की आवक केवल 19.19 लाख टन रही है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 26.25 लाख टन था। इस तरह करीब 27 प्रतिशत की गिरावट सामने आई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस सीजन में कुल बासमती उत्पादन लगभग 25 लाख टन रह सकता है, जो पिछले साल के 33.02 लाख टन से करीब 8 लाख टन कम है।

कृषि विभाग के अनुसार, यह गिरावट खेती के रकबे में कमी के कारण नहीं, बल्कि बाढ़ और अत्यधिक बारिश से हुए नुकसान के चलते हुई है। इस वर्ष पंजाब में लगभग 6.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बासमती की खेती हुई, जो पिछले साल से थोड़ा अधिक है। हालांकि, माजा क्षेत्र समेत मालवा और दोआबा के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ से 50,000 से 70,000 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई। इससे वास्तविक बासमती क्षेत्र घटकर करीब 6.15–6.25 लाख हेक्टेयर रह गया।

अब तक सबसे अधिक बासमती की खरीद अमृतसर में हुई है, जहां 4.90 लाख टन की आवक दर्ज की गई। इसके बाद फाजिल्का (2.97 लाख टन), पटियाला (2.19 लाख टन), संगरूर (1.60 लाख टन), तरनतारन (1.46 लाख टन) और गुरदासपुर (1.34 लाख टन) प्रमुख जिले रहे। माजा क्षेत्र के तीन जिलों—अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर—में कुल आवक का करीब 40 प्रतिशत बासमती पहुंचा।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार और भारी बारिश के कारण प्रति एकड़ उत्पादन भी गिरा है। जहां सामान्य तौर पर किसान 21–22 क्विंटल प्रति एकड़ उपज लेते थे, वहीं इस बार उत्पादन घटकर 16–18 क्विंटल प्रति एकड़ रह गया है। इससे कुल उत्पादकता पर सीधा असर पड़ा है।

हालांकि, उत्पादन घटने के बावजूद बासमती की वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है। पंजाब देश के कुल बासमती निर्यात में करीब 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। निर्यातकों का मानना है कि आपूर्ति कम होने के चलते बाजार में कीमतें बढ़ी हैं। इस समय बासमती की अलग-अलग किस्में 2,700 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही हैं। चूंकि बासमती एमएसपी के दायरे में नहीं आता, इसलिए इसकी कीमतें मुख्य रूप से निजी व्यापारियों और निर्यातकों द्वारा तय होती हैं।

पंजाब राइस मिलर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के निदेशक अशोक सेठी के अनुसार, “करीब 70,000 हेक्टेयर फसल के नुकसान और बारिश से उपज घटने के कारण उत्पादन में गिरावट आई है। फिर भी निर्यात मांग बनी रहने से किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।”

आने वाले हफ्तों में मंडियों में वास्तविक आवक और निर्यात के रुझान यह तय करेंगे कि मौसम की इस मार का पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था पर अंतिम असर कितना गहरा होगा।