5 नवंबर 2025 — पंजाब में पराली जलाने के मामलों में एक बार फिर तेज़ उछाल देखने को मिल रहा है। बीते 10 दिनों में राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 78 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, किसान अब तेजी से खेत खाली कर रहे हैं क्योंकि गेहूं की बुआई का समय (1 से 15 नवंबर) तेजी से बीत रहा है।
पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (PRSC) के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 4 नवंबर के बीच राज्य में 2,839 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। यह पिछले साल के 4,394 मामलों से करीब 35% कम और 2023 के 14,173 मामलों से लगभग 80% कम है।
लेकिन 26 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच 2,218 नए मामले सामने आए, जो इस सीजन के कुल मामलों का तीन-चौथाई हैं।
नवंबर की शुरुआत में सबसे ज्यादा आग के मामले
1 नवंबर को एक ही दिन में 442 घटनाएं दर्ज की गईं, जो इस सीजन का सबसे बड़ा उछाल था।
इसके बाद 29 अक्टूबर को 283, 3 नवंबर को 256, और 4 नवंबर को 321 नए मामले सामने आए।
कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “15 नवंबर के बाद गेहूं की पैदावार क्षमता हर दिन घटती जाती है। किसान देरी से धान कटने के कारण अब खेत जल्दी खाली कर रहे हैं।”
अब तक लक्ष्य के 35 लाख हेक्टेयर में से करीब 10.5 लाख हेक्टेयर (30%) पर गेहूं की बुआई पूरी हो चुकी है।
सबसे ज्यादा पराली जलाने वाले जिले
•संगरूर – 510 मामले
•तरण तारन – 506 मामले
•फिरोजपुर – 296 मामले
•अमृतसर – 249 मामले
•बठिंडा – 197 मामले
•पटियाला – 167 मामले
•मानसा – 126 मामले
•कपूरथला – 110 मामले
•मोगा – 101 मामले
इन नौ जिलों में कुल घटनाओं का करीब 80% हिस्सा दर्ज किया गया है।
पिछले वर्षों से तुलना
संगरूर में पिछले साल इसी अवधि में 629, जबकि 2023 में 2,147 मामले दर्ज हुए थे।
तरण तारन में 2024 में 579 और 2023 में 1,585 मामले सामने आए थे।
4 नवंबर 2025 को राज्य में 321 नई घटनाएं दर्ज की गईं — जो पिछले साल के 262 से अधिक हैं, लेकिन 2023 के 1,360 से काफी कम हैं।
हालांकि कुल संख्या इस बार कम है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में आई तेजी अगर जारी रही, तो अंतर कम हो सकता है।
मौसम और देरी ने बढ़ाई मुश्किल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल अक्टूबर में हुई देर तक बारिश के कारण धान की कटाई में देरी हुई।
अब किसान केवल दो सप्ताह के भीतर गेहूं की बुआई पूरी करने की कोशिश में हैं, इसलिए कई किसान जागरूकता और जुर्माने के बावजूद पराली जलाने को मजबूर हैं।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के एक अधिकारी ने कहा, “कुल मामलों में कमी आई है, लेकिन सीजन के अंतिम दिनों की आग चिंता का विषय बनी हुई है। अगले 10 दिन बेहद अहम होंगे।”
कार्रवाई और दंड
पंजाब में 31.72 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती हुई थी, जिसमें से 85.79% फसल की कटाई 3 नवंबर तक पूरी हो चुकी थी।
•1,009 मामलों में पर्यावरण मुआवज़ा लगाया गया, कुल ₹52.75 लाख, जिसमें से ₹23.65 लाख वसूल भी किए गए।
•765 FIR दर्ज हुईं और 946 रेड एंट्री खेत रिकॉर्ड में की गईं।
•9 नोडल अधिकारियों पर कार्रवाई की गई और 576 चेतावनी नोटिस जारी हुए।
हालांकि पिछले दो वर्षों की तुलना में पराली जलाने के मामलों में कमी दिख रही है, लेकिन राज्य का आग-मानचित्र (fire map) फिर से लाल रंग में बदल गया है।
अधिकारियों का कहना है कि अगर आने वाले 10 दिनों में रुझान नहीं बदला, तो यह सुधार अस्थायी साबित हो सकता है।