किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में उड़द उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलने जा रहा है। नेफेड (NAFED) की ओर से इन जिलों में कुल 50 क्रय केंद्र खोले जाएंगे, जहां किसान अपनी उड़द फसल 7,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच सकेंगे। इसके लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बहुत जल्द खरीद कार्य भी आरंभ कर दिया जाएगा। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसान को उपज बेचने के तीन कार्यदिवस के भीतर भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाए।

नेफेड द्वारा संचालित ‘आत्मनिर्भर दाल योजना’ के तहत 29 जनवरी 2026 तक किसानों से सीधी खरीद की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना है। नेफेड के राज्य प्रमुख रोहित जैमन ने बताया कि प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल के निर्देशन में पूरी व्यवस्था को तेज, सरल और किसान-केंद्रित बनाया गया है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक पात्र किसान इस योजना का लाभ उठा सके।

राजधानी लखनऊ सहित ललितपुर, झांसी, महोबा, जालौन, हमीरपुर, बदायूं, बरेली, हरदोई, उन्नाव, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, मुरादाबाद, सोनभद्र, सीतापुर और शाहजहांपुर जिलों में खरीद की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसान e-Samridhi ऐप के माध्यम से या अपने नजदीकी नेफेड केंद्र पर जाकर पंजीकरण करा सकते हैं।

इधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि धरती माता केवल हमें अन्न ही नहीं देती, बल्कि उसका स्वास्थ्य भी हमारे लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि धरती स्वस्थ रहेगी तो मानव और समूची सृष्टि सुरक्षित रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस मंत्र को दोहराया जिसमें किसान की आय बढ़ाने के लिए लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

शुक्रवार को बाराबंकी के दौलतपुर ग्राम में आयोजित प्रगतिशील किसान सम्मेलन और ‘खेती की बात खेत पर’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रबी सत्र की किसान पाठशाला 8.0 का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने बहुफसली खेती, तकनीकी नवाचार, एमएसपी व्यवस्था की पारदर्शिता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि एक एकड़ में ढाई सौ क्विंटल आलू उत्पादन और दो लाख रुपये मूल्य का केला उत्पादन, कम लागत और अधिक उत्पादन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने एफपीओ के माध्यम से सहकारी खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया और पद्मश्री रामशरण वर्मा सहित अन्य सफल किसानों को प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बताया।