पंजाब और जम्मू-कश्मीर में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। मौसम में सुधार और बारिश थमने से कश्मीर घाटी में झेलम नदी और अन्य जल स्रोतों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है। वहीं, पंजाब में भी लगातार हो रही बारिश से लोगों को थोड़ी राहत मिली है, हालांकि खेतों और गांवों में तबाही के निशान अभी भी बने हुए हैं।
पंजाब की हालत
पंजाब सरकार ने केंद्र से तुरंत राहत पैकेज की मांग की है। राज्य के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि 4 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि डूब गई है, जिसमें धान की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। यह तबाही राज्य और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा दोनों के लिए खतरा है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा मुआवजा राशि ₹6,800 प्रति एकड़ नाकाफी है और इसे कम से कम ₹50,000 प्रति एकड़ किया जाए।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब दौरे के दौरान हालात को “जल प्रलय” करार दिया और किसानों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
लुधियाना जिले में सतलुज नदी के तेज बहाव से बांध पर दबाव बढ़ गया है। फिरोजपुर में गांववाले आराजी एडवांस बांध को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। बीएसएफ की कई चौकियां और बाड़बंदी के हिस्से नदी में डूब गए हैं। उधर, पाकिस्तान की चौकियां भी नदी के उफान से प्रभावित हैं।
जम्मू-कश्मीर का हाल
अधिकारियों के अनुसार, झेलम नदी का जलस्तर संगम (अनंतनाग) और श्रीनगर के राम मुंशीबाग में खतरे के निशान से नीचे आ गया है।
हालांकि, रामबन जिले में 283 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और 950 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले की 84 सड़कें, 98 जल योजनाएं और 71 पावर फीडर भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
शिक्षण संस्थान एहतियातन लगातार तीसरे दिन बंद रहे और अब सोमवार से कक्षाएं शुरू होंगी।
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग चौथे दिन भी बंद रहा।
माता वैष्णो देवी यात्रा 11वें दिन भी स्थगित रही। यात्रा 26 अगस्त को भूस्खलन के कारण रोकी गई थी, जिसमें 34 श्रद्धालुओं की जान गई थी।
अन्य राज्य
•हिमाचल प्रदेश: कुल्लू में ब्यास नदी उफान पर, तिब्बती कॉलोनी की सुरक्षा दीवार टूटी।
•दिल्ली: यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर, निचले इलाकों से लोगों का सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन।
•उत्तर प्रदेश: गाजियाबाद में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से 55 परिवारों को बचाया गया।
निचोड़
मौसम साफ होने से हालात काबू में आने लगे हैं, लेकिन पंजाब, कश्मीर और अन्य राज्यों में बाढ़ और बारिश से हुआ ढांचागत नुकसान, फसल हानि और लोगों का विस्थापन लंबे समय तक असर डाल सकता है।