सहारनपुर (उत्तर प्रदेश): परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करने वाले किसानों की सूची में सहारनपुर के राजेंद्र अटल का नाम तेजी से उभर रहा है। कृषि नवाचारों के लिए पहचाने जाने वाले अटल ने इस बार एक ऐसा चमत्कारी आलू विकसित किया है जो ज़मीन में नहीं, बल्कि हवा में उगता है — और लोग देखकर पूछ बैठते हैं, “क्या वाकई ऐसा भी आलू होता है?”
इस अनोखी किस्म का नाम है “एयर पोटैटो” (हवा में उगने वाला आलू)। यह बेल पर उगने वाला आलू मुख्य रूप से एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पाया जाता है, और माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति नाइजीरिया में हुई थी। मॉनसून के बाद इसकी बेलें तेजी से फैलती हैं और कुछ ही हफ्तों में ट्यूबर (गांठदार फल) नजर आने लगते हैं।
राजेंद्र अटल ने अब इसे सहारनपुर की भूमि और जलवायु में सफलतापूर्वक उगाकर किसानों के लिए एक नई उम्मीद जगा दी है। यह आलू आम आलू की तरह पकाया जा सकता है — उबालकर, भूनकर या सब्जी बनाकर — और स्वाद में भी बेहतरीन होता है।
भारत में यह किस्म परंपरागत रूप से उत्तराखंड और कुछ पहाड़ी इलाकों में उगाई जाती रही है, लेकिन अब यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तराई में भी अपनी पहचान बना रही है। राजेंद्र अटल इसे स्थानीय किसानों के बीच बांटने की तैयारी में हैं, ताकि व्यावसायिक खेती को बढ़ावा दिया जा सके।
बाजार में मांग और मूल्य: एयर पोटैटो की मांग सर्दियों के मौसम में बढ़ जाती है, और बाजार में यह ₹70 से ₹100 प्रति किलो तक बिकता है। लेकिन इसके उत्पादन में कमी और विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है, इसलिए इसके संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्राकृतिक कुंज और शाकंभरी विश्वविद्यालय की साझेदारी:
लोकल18 से बातचीत में प्राकृतिक कुंज संस्था के आचार्य राजेंद्र अटल ने बताया कि शाकंभरी विश्वविद्यालय उनके साथ मिलकर कई कृषि नवाचारों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा,
“सभी जानते हैं कि पारंपरिक आलू ज़मीन के नीचे उगता है, लेकिन कुछ जैन समुदायों में ज़मीन के भीतर पैदा होने वाली चीजें खाने से परहेज किया जाता है। ऐसे में यह हवा में उगने वाला आलू एक वैकल्पिक समाधान बन सकता है।”
एक बेल से 5 से 10 किलो उत्पादन:
सितंबर-अक्टूबर के महीनों में इस आलू की बेलें ट्यूबर देना शुरू कर देती हैं। आकार और स्वाद में ये आम आलू की तरह ही होते हैं। एक बेल से औसतन 5 से 10 किलो तक उत्पादन मिलता है।
₹50 से ₹100 में उपलब्ध होंगी पौधें:
राजेंद्र अटल अब इसकी पौध तैयार कर रहे हैं, जिन्हें ₹50 से ₹100 प्रति पौधा की दर से किसानों को वितरित किया जाएगा। आने वाले महीनों में सहारनपुर के कई किसान इस नायाब किस्म की खेती करते नजर आएंगे।