माइक्रोप्लास्टिक के बुरे असर को लेकर सदन में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) – राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (एनआईआरईऐच) ने मानव शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी पर अध्ययनों की एक व्यवस्थित समीक्षा की है। समीक्षा के निष्कर्षों के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक की खुराक प्रतिक्रिया और विषाक्तता खतरों के अध्ययनों का वर्तमान में अभाव है।

अलग से सीपीसीबी के समन्वय में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी ), आईसीएमआर, केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआई पीटी), राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र (एनसीएससीएम) की एक समिति ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया कि मानव शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी के बारे में अध्ययन तो हैं, लेकिन मनुष्यों पर उनके शारीरिक या मनोवैज्ञानिक प्रभाव के बारे में कोई अध्ययन नहीं है।

सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने लोकसभा में कहा कि जल जीवन मिशन के शुभारंभ के बाद से ग्रामीण घरों तक नल से पानी की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन की घोषणा के समय, देश में 3.23 करोड़ (16.71 फीसदी) ग्रामीण घरों में नल के पानी के कनेक्शन होने की जानकारी थी।

अब तक, जैसा कि 18 मार्च, 2025 तक राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बताया गया है, लगभग 12.29 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण घरों को जेजेएम के तहत नल के पानी के कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इस प्रकार, 18 मार्च, 2025 तक, 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों में से, लगभग 15.53 करोड़ (80.20 फीसदी) घरों में नल से पानी की आपूर्ति होने की जानकारी है।

आज तक, आठ राज्य अर्थात गोवा, तेलंगाना, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम और तीन केंद्र शासित प्रदेश अर्थात पुडुचेरी, डीएंडडी और डीएंडएनएच, तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह ‘हर घर जल’ राज्य व केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं। यानी 100 फीसदी घरों में नल से पानी की आपूर्ति हो रही है।