उत्तर प्रदेश के मेरठ मेरठ जिले में किठौर और शाहजहांपुर फल पट्टी प्रदेश की प्रमुख फल उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है। यहां पर समय-समय पर फलों की ऐसी प्रजातियां उत्पन्न की गई है जो देश ही नहीं विदेशों इस में भी अपना जलवा कायम करती रही हैं। मेरठ की इस फल पटटी में आम, अमरूद, केला, पपीता, अंगूर, आडू, लीची के अलावा खरबूजा की पैदावार भी प्रमुख तौर से की जाती है। इस समय मेरठ में आडू की वैरायटी शाने पंजाब और अर्ली प्रभात का डंका देश से विदेश तक बज रहा है। इन दोनों प्रजाति के पेड़ों पर आए आडू खाने में तो स्वादिष्ट हैं ही साथ ही ये किसानों को भी खूब मालामाल कर रहे हैं।

फलदार पौधों का कारोबार करने वाले शाहनवाज कहते हैं कि आडू की ये वैरायटी जून-जुलाई में बोई जाती है। मेरठ और पश्चिमी उप्र के किसानों का रूझान अब फलों की खेती को ओर अधिक है। इससे जहां किसानों को आर्थिक लाभ अधिक होता है वहीं दूसरी ओर इसकी देखरेख में मेहनत और लागत और भी कम आती है। उन्होंने बताया कि मेरठ में अर्ली प्रभात की वैराइटी किसानों के बीच अधिक लोकप्रिय है। अर्ली प्रभात में 3 से 5 फीट का पौधा भी फसल देनी शुरू कर देता है। प्रभात प्रजाति के पौधे का आडू खाने में अत्यन्त मीठा और लजीज होता है।

मेरठ से अर्ली प्रभात की किस्म विदेश तक सप्लाई हो रही है। विदेश में फलों की पौधों का निर्यात करने वाले व्यापारी मेरठ से अर्ली प्रभात की वैरायटी नेपाल,म्यामार और बांग्लादेश तक भेज रहे हैं। शाहनवाज बताते हैं कि उनको पिछले साल नेपाल से करीब 1 लाख आडू के पौधों का आर्डर मिला था। जिसको वे आधा ही पूरा कर पाए थे। उन्होंने बताया कि ये आडू की वैरायटी मेरठ में ही तैयार की गई है। इसलिए मेरठ से ही लोग इसकी पौध खरीदना अधिक पसंद करते हैं।

गौरतलब है कि आड़ू की शाखाओं को टूटने से बचाने, फलों के आकार और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए उन्हें पतला किया जाता है। पतला करना एक समय लेने वाला, महंगा काम है। आड़ू की फसल के भार को कम करने के लिए फूल आने से पहले, उसके दौरान और बाद में पतला करने की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। शुरुआती मौसम में पतला करने की तकनीक प्रतिस्पर्धा को कम करके फलों के आकार को बढ़ा सकती है। जल्दी पकने वाली किस्मों और बड़े फलों के लिए कम आनुवंशिक क्षमता वाली किस्मों को पहले पतला किया जाना चाहिए ताकि आकार बढ़ाने के लिए सबसे अच्छा अवसर मिल सके।

भारत से विदेश में आडू (ताज़ा और अमृत सहित) का निर्यात 2023 में 60.89 मिलियन डॉलर का था, जिसमें 25,621 किलोग्राम आडू का निर्यात किया गया था। वर्ष 2023 में, भारत से 25,621 किलोग्राम आडू का निर्यात किया गया था।