संगम की रेती पर महाकुंभ में रूस-यूक्रेन के विदेशी संत एक ही शिविर में आमने-सामने शांति के लिए जप-तप-ध्यान करेंगे। इसके लिए लकड़ी और कांच से युक्त रूस-यूक्रेन आध्यात्मिक गलियारा तैयार किया जा रहा है।
तीन साल से जारी विनाशकारी युद्ध को खत्म कराने की कोशिशें भले ही अब तक नाकाम रही हों, लेकिन महाकुंभ में सैकड़ों अन्य संतों ने की उपस्थिति में यूक्रेन और रूस के सन्यासियों ने एक ही कुंड में विश्व शांति के लिए संकल्प लिया है। कुंभ में हवन कुंड की वेदी में दोनों पक्ष एक जैसी शांति की कामना का जयघोष करते के साथ आहुति देंगे। त्रिवेणी तट इस बार दुनिया के दो जानी दुश्मन देशों के मिलन का साक्षी बनने जा रहा है। एक-दूसरे को मटियामेट करने पर तुले दोनों विरोधी देशों के संत एक ही शिविर में एक ही छत के नीचे ध्यान-पूजा करेंगे। विरोधी देशों के संतों के अद्भुत मिलन का यह दृश्य दुनिया इस बार संगम तट पर देख सकेगी।
मिली जानकारी अनुसार हाल में ही ब्रह्मलीन हुए श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े के महायोगी महामंडलेश्वर स्वामी सोमनाथ गिरी उर्फ पायलट बाबा के शिविर में रूस और यूक्रेन के संतों के शाही वुडेन कॉटेज आमने-सामने लग रहे हैं। संगम लोवर पर सेक्टर-18 में पश्चिमी देशों के बीच हथियारों की होड़ और युद्ध पर अरबों रुपये डॉलर के धन प्रवाह के बीच विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक समागम में रूस-यूक्रेन दोनों देशों के साधु-संन्यासियों के लिए एक ही हवन कुंड भी बनाया जा रहा है।
जापान की योगमाता महामंडलेश्वर केको आईकावा उर्फ स्वामी कैला माता के आचार्यत्व में रूस-यूक्रेन के संन्यासी विश्व शांति के लिए जतन करेंगे। इसके लिए हवन कुंड और सत्संग भवन के पास ही दो मंजिला लकड़ी और शीशे से रूस-यूक्रेन गलियारा बनाया जा रहा है।श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के तपस्वी खप्पर बाबा के अनुसार महाकुंभ में आने वाले रूस-यूक्रेन के 50 से अधिक संत श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े से ही संन्यास दीक्षा लिए हुए हैं। इन संन्यासियों के लिए दो मंजिला सुविधाओं से युक्त वुडेन कॉटेज बनाया जा रहा है। इसमें एक ही गलियारे में आमने-सामने दोनों देशों के संतों का कॉटेज बन रहे हैं।