अनानास की कीमतों में तेज़ उछाल से किसानों के चेहरे खिले हैं। बीते एक दशक में पहली बार अनानास के दाम अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गए हैं। पिछले 10 दिनों में बाजार में तेज़ी देखी गई है, जहां पका और कच्चा अनानास ₹50 से ₹52 प्रति किलो के बीच बिक रहा है। कारोबारियों के अनुसार आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना है।

केरल पाइनएप्पल ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बेबी जॉन ने कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई मौसमी और बाजार से जुड़े कारण बताए। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में इस बार सर्दी का मौसम छोटा रहा और गर्मी जल्दी शुरू हो गई, जिससे अनानास की मांग अचानक बढ़ गई। इसके साथ ही शादी-विवाह के मौसम की शुरुआत ने भी खपत को बढ़ावा दिया है।

उत्पादन घटा, उपलब्धता प्रभावित

बेबी जॉन के अनुसार, प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में पहले पड़ी भीषण गर्मी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में आपूर्ति कम हो गई। इसके अलावा संतरा और सेब जैसे अन्य फलों के दाम बढ़ने से भी उपभोक्ता अनानास की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।

बेहतर सड़क संपर्क से बढ़ी मांग

हाल के वर्षों में हाईवे कनेक्टिविटी में सुधार से अनानास अब उत्तर भारत के कई बाजारों तक तीन दिन में पहुँच रहा है, जबकि पहले इसमें पांच से छह दिन लगते थे। कम समय में पहुंचने से फल की ताजगी बनी रहती है, जिससे मांग और तेज़ हुई है।

रमज़ान में खपत बढ़ने की उम्मीद

बेबी जॉन ने बताया कि फरवरी के मध्य से मार्च तक रमज़ान के दौरान अनानास की खपत और बढ़ने की संभावना है। रमज़ान में इफ्तार के दौरान अनानास एक महत्वपूर्ण फल माना जाता है।

सूखे जैसे हालात और श्रमिक संकट

उन्होंने बताया कि इस सीज़न में दिसंबर से बारिश नहीं होने के कारण कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं, जिससे इस साल उत्पादन घटकर 6.25 लाख टन रहने का अनुमान है।

कोठट्टुकुलम के किसान जॉय इसाक ने कहा कि सूखे हालात के साथ-साथ श्रमिकों की भारी कमी भी बड़ी समस्या बन गई है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) से जुड़े मुद्दों के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्य लौट गए हैं। अनानास की कटाई इन्हीं मजदूरों पर निर्भर रहती है और उनकी अनुपस्थिति से समय पर फल तोड़ने में दिक्कत आ रही है।