कभी सिर्फ़ सर्दियों में मिलने वाला स्वादिष्ट इलाहाबादी सुरखा अमरूद—जिसे एप्पल अमरूद भी कहा जाता है—अब सालभर उपलब्ध हो सकता है। संगम नगरी प्रयागराज में एक नई कृषि पहल के ज़रिए इस दिशा में प्रयोग शुरू किया गया है।
पारंपरिक रूप से केवल ठंड के मौसम में तोड़े जाने वाले सुरखा अमरूद की सीमित उपलब्धता ने किसानों की रुचि और आय दोनों को प्रभावित किया है। इस स्थिति को बदलने के लिए ख़ुसरोबाग स्थित बागवानी प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसमें यूरोप की आधुनिक एस्पालियर तकनीक अपनाई जा रही है।
यह तकनीक फलदार पेड़ों को दीवार या जाली के सहारे समतल रूप में बढ़ने के लिए प्रशिक्षित करती है, जिससे पेड़ों को समान रूप से धूप मिलती है, फलों का उत्पादन बढ़ता है और तुड़ाई आसान हो जाती है।
“पहली बार 27 सुरखा अमरूद के पेड़ एस्पालियर प्रणाली से लगाए गए हैं,” केंद्र के प्रशिक्षण प्रभारी विजय किशोर सिंह ने बताया। “लक्ष्य है फसल का मौसम बढ़ाना और किसानों की आमदनी में इज़ाफ़ा करना। यदि प्रयोग सफल होता है, तो यह पूरे क्षेत्र में अमरूद की खेती में क्रांति ला सकता है।”
यह परियोजना केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान, रहमान खेड़ा (लखनऊ) द्वारा लागू की जा रही है। इस पर उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने 24 लाख रुपये का निवेश किया है।
उप निदेशक (बागवानी), प्रयागराज कृष्णा चौधरी ने बताया, “इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पेड़ के हर हिस्से को समान रूप से धूप मिलती है। इससे अमरूद का आकार और रंग एक जैसा होता है। तुड़ाई और फल की पैकिंग भी आसान हो जाती है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमरूद के उत्पादन में पत्तियों की अहम भूमिका होती है। “एक अच्छे अमरूद के लिए लगभग 30–35 स्वस्थ पत्तियां ज़रूरी होती हैं। एस्पालियर प्रणाली पत्तियों के बेहतर विकास को प्रोत्साहित करती है, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।”
वर्तमान में प्रयागराज मंडल में 2,770 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद की खेती होती है, जिससे लगभग 44,000 टन उत्पादन होता है। इनमें सुरखा अमरूद की खेती प्रयागराज में 335 हेक्टेयर और कौशांबी में 2,200 हेक्टेयर में होती है। हर साल प्रयागराज से लगभग 400 टन और कौशांबी से 35,000 टन सुरखा अमरूद की पैदावार होती है।
अपने गहरे गुलाबी गूदे, लाल सेब जैसी चमकदार त्वचा और कम बीजों के कारण इलाहाबादी सुरखा अमरूद पूरे भारत में काफ़ी लोकप्रिय है। हाल के वर्षों में इसकी मांग ओमान, दुबई और इंग्लैंड जैसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी बढ़ी है।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो प्रयागराज का सुरखा अमरूद सिर्फ़ मौसमी स्वाद नहीं रहेगा, बल्कि सालभर उपलब्ध एक वैश्विक ब्रांड बन सकता है।