पंजाब के बठिंडा में किसानों और सरकार के बीच भारतमाला प्रोजेक्‍ट के तहत किए जा रहे जमीन अधि‍ग्रहण के मुआवजे को लेकर विवाद बना हुआ है। भारतमाला एक हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्‍ट है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में माल और यात्री आवागमन में सुधार करना है। बठिंडा से अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे गुजरेगा, जिसके लिए सरकार ने किसानों की जमीन ली है। किसान नेताओं ने दावा किया है कि एक कहीं जमीन की कीमत ज्‍यादा दी जा रही है तो कहीं जमीन की कीमत कम दी जा रही है। उनका विरोध मुआवजे की राशि में असमानता को लेकर है।

प्राप्त जानकारी अनुसार सैकड़ों किसानों ने इसी मुद्दे को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों से झड़प हो गई। भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के बैनर तले किसान बठिंडा के मैसर खाना गांव में जुटे और प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि उन्हें सरकार की ओर से अधिग्रहित जमीन के बदले वादे के अनुसार उचित मुआवजा नहीं दिया गया है। विरोध-प्रदर्शन के दौरान संगरूर के किसानों के एक समूह ने बठिंडा के दुनेवाला गांव में बैरिकेड तोड़ दिए और पुलिस के साथ झड़प की, जिस बाद पुलिस ने किसानों को पर आंसू गैस के गोले दागे।

एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, उन्‍हें मुआवजा दिया जा चुका है। इनमें से कोई भी प्रदर्शनकारी किसान बठिंडा का नहीं है। वे दूसरे जिलों से यहां आकर उपद्रव कर रहे हैं। कानून के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को जमीन का कब्जा दे दिया गया है। अगर किसी को जमीन अधिग्रहण के मुआवजा राश‍ि और भुगतान को लेकर समस्‍या है तो उन्‍हें मध्यस्थता अदालत में जाकर मामले को सुलझाना चाहिए। उन्‍होंने लोगों से कानून को अपने हाथ में न लेने की अपील की।

भारतमाला परियोजना के तहत अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी और करीब 62.7 किलोमीटर क्षेत्र बठिंडा प्रशासन की सीमा में आता है। जमीन अधिग्रहण के लिए निर्धारित 731 करोड़ रुपये में से 693 करोड़ रुपये पहले ही किसानों को दिए जा चुके हैं। हम यहां अधि‍ग्रहित जमीन का कब्जा सुनिश्चित करने आए हैं।

एक जानकारी अनुसार बठिंडा के जिला अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मुआवजे की राशि में असमानता जमीन की हाईवे की दूरी के आधार पर है। गांवों के अंदरूनी हिस्सों में जमीन के लिए 50 लाख रुपये मुआवजा राशि दी जा रही है, जबकि हाईवे के किनारे की जमीन के लिए 70 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। किसानों और पुलिसकर्मियों की झड़प में लगभग पांच से छह पुलिसकर्मी और दर्जनभर किसान घायल हुए। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनका इलाज चल रहा है।

एक जानकारी अनुसार बठिंडा के जिला अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मुआवजे की राशि में असमानता जमीन की हाईवे की दूरी के आधार पर है। गांवों के अंदरूनी हिस्सों में जमीन के लिए 50 लाख रुपये मुआवजा राशि दी जा रही है, जबकि हाईवे के किनारे की जमीन के लिए 70 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। किसानों और पुलिसकर्मियों की झड़प में लगभग पांच से छह पुलिसकर्मी और दर्जनभर किसान घायल हुए। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनका इलाज चल रहा है।

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