ज़मीन में पानी के गहराता संकट अब पंजाब के साथ हरियाणा सरकार की बड़ी चिंता है। सिंचाई को हर करने में जुटी हरियाणा – सरकार ने किसानों को मक्का, बाजरा, मूंग, उड़द,अरहर, कपास जैसी फसलों को उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। एक किलो बासमती धान को
तैयार करने के लिए किसान को तीन हजार लीटर पानी की जरूरत होती है।

योजना का मुख्य उद्देश्य ये है कि राज्य की उन जगहों पर जहां पानी की कमी के चलते धान की खेती नहीं हो सकती है, वहां किसी और फसल को लगाया जाए और किसान को फायदा पहुंचाया जाए। राज्य के मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया है कि किसान धान की खेती न कर अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती करें क्योकि धान की खेती में अधिक पानी लगता है।

इस योजना के तहत वर्तमान सीजन में धान की जगह अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को योजना के अंतर्गत 7,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से सहायता राशि दी जाएगी। साथ ही इस योजना के तहत किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

 

जो किसान पारंपरिक फसल यानी धान की खेती को छोड़ कर अन्य फसलों की खेती को अपनाना चाहते हैं, वे ‘मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए कृषि और किसान कल्याण विभाग के निर्देशानुसार किसान दिए गए वेबसाइट के लिंक पर जाकर 31 जुलाई 2023 तक रजिस्ट्रेशन कर इसका लाभ ले सकते हैं।

सरकार जहां “मेरा पानी मेरी विरासत योजना” के माध्यम से राज्य में गिरते भूजल को बचाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को अन्य फसलों के उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। हरियाणा सरकार की तरफ से कहा गया है कि अगर किसान धान की पारंपरिक खेती के बजाय मक्का, अरहर, उड़द, कपास, बाजरा, मूंग जैसी फसलें उगाते हैं तो उन्हें 7,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह सहायता राशि प्रति एकड़ के हिसाब से दी जा रही है।