भारत में पहली बार किसी राज्य ने गर्मियों में पानी की कमी से निपटने के लिए ‘जल बजट’ बनाया है | जल विशेषज्ञों के मुताबिक, केरल की इस पहल से पानी की मांग और आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने में मदद मिलेगी |

केरल में नदियों, झीलों, तालाबों और जलधाराओं की अच्छी संख्या है लेकिन राज्य मॉनसून में अच्छी बारिश के बावजूद गर्मी के मौसम में पानी की समस्या से जूझता है | केरल के ऐसे कई इलाके हैं जहां हर साल गर्मी के दौरान पानी का संकट खड़ा हो जाता है |

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने जल-बजट के पहले चरण का विवरण जारी किया | उन्होंने कहा कि राज्य में पानी की उपलब्धता में कमी दिखाई दे रही है, इसलिए जल बजट जरूरी हो गया ताकि इस बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन का उचित इस्तेमाल हो सके और इसकी बर्बादी पर भी रोक लगे |

मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि राज्य में 44 नदियां, कई झीलें, तालाब और नहरें हैं और अच्छी बारिश के बावजूद कुछ इलाकों में गर्मियों में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है |

उन्होंने कहा, “इसलिए क्षेत्र में उपलब्ध पानी के अनुसार पानी के उपयोग को विनियमित किया जाएगा | यह पानी का बजट है. इससे लोगों में अनावश्यक रूप से पानी बर्बाद न करने के बारे में जागरूकता पैदा होगी और हम इसके माध्यम से पानी बचाने के लक्ष्य को हासिल कर सकेंगे.”

भारत में औसत सालाना बरसात से चार हजार अरब घन मीटर पानी आता है जो देश में ताजा पानी का प्रमुख स्रोत भी है | लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की दर अलग अलग है | जल प्रबंधन के लिए देश में कई प्रणालियों का उपयोग हो रहा है, इसके बावजूद बड़ी मात्रा में पानी बहकर समंदर में चला जाता है |

जल प्रबंधन और बरसात के पानी को बचाने के मुद्दे पर सालों से चर्चा हो रही है लेकिन केरल ने एक कदम आगे बढ़कर सबके लिए एक मिसाल पेश किया है |