उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि कृषि को गरीबी और पलायन का कारण नहीं, बल्कि समृद्धि का आधार बनाना होगा। उन्होंने कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को गति देने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि किसानों की आय में वृद्धि के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी जा सके।
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) के 36वें स्थापना दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘विकसित कृषि – विकसित उत्तर प्रदेश @ 2047’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विशिष्ट कृषि वैज्ञानिकों, युवा नवप्रवर्तकों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया।
1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इसके लिए राज्य ने 2029 तक $1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तय किया है।
उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश दुनिया का शायद इकलौता क्षेत्र है, जहां 86% कृषि भूमि सिंचित है। हमारे पास उपजाऊ जमीन और प्रचुर जल संसाधन हैं, लेकिन हमें इनका अधिकतम उपयोग करना होगा।”
कृषि में व्यापक नेटवर्क, लेकिन अपनाने की दर कम
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में चार राज्य-स्तरीय कृषि विश्वविद्यालय, एक निर्माणाधीन विश्वविद्यालय, केंद्र द्वारा संचालित कई विश्वविद्यालय और 15 से अधिक प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थान हैं। इसके अलावा, 89 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) किसानों तक तकनीक और जानकारी पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
इसके बावजूद उन्होंने चिंता जताई कि “राज्य के केवल 25-30% किसान ही वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक को अपनाते हैं। जब तक यह अनुपात नहीं बढ़ता, तब तक अनुसंधान का असली लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंचेगा।”
कृषि के क्षेत्र में विशाल संभावनाएं
योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास कृषि, बागवानी और सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इन्हें पूरी तरह से उपयोग में लाने के लिए स्थानीय जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र के अनुसार अनुसंधान को तेज करने की आवश्यकता है।
स्पष्ट लक्ष्य तय करने पर जोर
सीएम ने कहा कि “हमने Vision 2047 का एक एक्शन प्लान तैयार किया है, लेकिन हमें 2027, 2029 और 2035 जैसे छोटे और मध्यकालिक लक्ष्य भी तय करने होंगे ताकि प्रगति साफ दिखाई दे।” उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और KVKs से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
इजराइल मॉडल पर सवाल
मुख्यमंत्री ने इजराइल के साथ स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत और इजराइल की तकनीक ने बेहतरीन परिणाम दिए। उन्होंने सवाल किया कि “अगर इजराइल ऐसा कर सकता है तो हमारे कृषि विश्वविद्यालय इसे क्यों नहीं दोहरा सकते? हमें इस मॉडल का विस्तार करने की जरूरत है।”
जलवायु परिवर्तन की चुनौती और किसानों के लिए चेतावनी
योगी ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता जताते हुए कहा कि इस बार जहां कुछ जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, वहीं कुछ पड़ोसी राज्यों में अत्यधिक वर्षा देखी जा रही है। उन्होंने पूछा, “क्या हम ऐसी मौसमीय अस्थिरता से निपटने के लिए तैयार हैं?”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बोआई में केवल एक महीने की देरी और पुराने बीजों के इस्तेमाल से 30% तक उत्पादन घट सकता है। “क्या किसानों के पास देर से बोआई के लिए नई किस्मों के बीज हैं? क्या उन्हें समय पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिल रहा है?” उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे खेतों में जाकर वैज्ञानिक तकनीकों का प्रदर्शन करें ताकि किसानों में भरोसा जगे।
“किसानों का पलायन हमारी विफलता”
योगी ने कहा कि यदि किसान आज भी पारंपरिक पद्धतियों पर निर्भर हैं और रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें आधुनिक तकनीकों और जानकारी से जोड़ने में हम सफल नहीं हो पाए हैं।