कर्नाटक के गडग जिले में किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से Netafim India ने ‘प्रगति’ नामक एक प्रशिक्षण और सम्मान समारोह का आयोजन किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से सिंघातालुरु लिफ्ट सिंचाई योजना (SLIS-3) के अंतर्गत आने वाले किसानों को समर्पित था।
Netafim India, जो कि एक प्रमुख स्मार्ट सिंचाई समाधान प्रदाता है, ने इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकें सिखाने, उपयोगी जानकारी साझा करने और सर्वश्रेष्ठ खेती पद्धतियों को अपनाने वाले किसानों को सम्मानित करने का प्रयास किया।
11,330 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन का प्रयोग
SLIS-3 परियोजना के तहत लगभग 11,330 हेक्टेयर भूमि कवर की जाती है, जहां अब कई किसान ड्रिप सिंचाई प्रणाली और फर्टिगेशन (पौधों को टपक सिंचाई के माध्यम से पोषक तत्व देने की तकनीक) का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं। इस क्षेत्र में किसान मक्का, सूरजमुखी, मूंग, प्याज, मिर्च और फूलों जैसी फसलें उगा रहे हैं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन किसानों ने अब फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरक और जल प्रबंधन करना सीख लिया है, जिससे उत्पादन में वृद्धि देखी जा रही है।
30 प्रगतिशील किसानों को मिला विशेष प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान 30 अग्रणी किसानों को चुना गया, जिन्हें इन आधुनिक तकनीकों में गहन प्रशिक्षण दिया गया। ये किसान अब अपने-अपने क्षेत्रों में सतत खेती के ब्रांड एंबेसडर के रूप में कार्य करेंगे और अन्य किसानों को भी प्रोत्साहित करेंगे।
प्रशिक्षण में मिले उपयोगी टिप्स और डिजिटल खेती की जानकारी
दिनभर चले इस प्रशिक्षण सत्र में किसानों को कई विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया, जैसे:
•परियोजना के लाभ
•ड्रिप सिंचाई से पैदावार बढ़ाने के उपाय
•फर्टिगेशन तकनीक
•प्रणाली का रखरखाव
•भविष्य की फसल योजना
•खेती में डिजिटल टूल्स का प्रयोग
WALMI और Netafim अधिकारियों ने की किसानों की सराहना
कार्यक्रम में जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (WALMI) के निदेशक गिरीश मरड्डी ने कहा कि “प्रगति कार्यक्रम SLIS-3 के किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बेहतरीन कदम है। ड्रिप सिंचाई, फर्टिगेशन और डिजिटल खेती का यह व्यावहारिक प्रशिक्षण किसानों को संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और बेहतर फसल उत्पादन में सक्षम बनाएगा।”
Netafim India के असिस्टेंट जनरल मैनेजर गिरीश देशपांडे ने कहा, “प्रगति के माध्यम से हम ऐसे किसानों का समुदाय बनाना चाहते हैं जो भविष्य की सोच रखते हैं। जब किसान एक-दूसरे से सीखते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन होता है।”