उत्तर प्रदेश विधासभा बजट सत्र के दौरान चर्चा के दौरान गन्ना किसानों का मुद्दा जोरशोर से उठा। मेरठ के सरधना विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अतुल प्रधान ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। सपा विधायक अतुल प्रधान कहा कि आज गन्ना के किसान कई चुनौतियों से घिरे हुए हैं। उन्हें बेहतर गन्ने की किस्म नहीं मिल पा रही है। लागत काफी बढ़ गई है. 10 से 12 हजार रुपये एक बीघे में गन्ने की खेती करने में लागत लग रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 70-80 प्रतिशत किसान छोटे जोत के हैं। ऐसे में अब उनकी कमाई नहीं रह गई है। लागत भी बहुत मुश्किल से ही निकल पा रहा है। इसलिए सरकार को गन्ने का रेट बढ़ाया जाना चाहिए ।
सपा विधायक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसानों की सबसे प्रमुख फ़सल गन्ना हैं. गन्ना किसानों को उनकी लागत का दाम नहीं मिल हैं। हमारी मांग हैं की सरकार गन्ना किसानों के दर्द को समझकर गन्ने का मूल्य 500 रूपये घोषित करें। यूपी के बजट सत्र में विपक्षी समाजवादी पार्टी के विधायकों के विरोध का अनोखा अंदाज देखा जा रहा है। सपा विधायक अतुल प्रधान ने आगे कहा कि “सरकार गन्ना किसानों के खिलाफ़ है।”
गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि अतुल जी पश्चिमी यूपी के बड़े किसान परिवार से हैं। लेकिन जोश-जोश में वह कुछ भी बोल देते हैं। गन्ने की लागत 10-12 हजार रुपये नहीं, बल्कि एक एकड़ पर एक लाख से ज्यादा की आती है। इसके बाद गन्ना मंत्री ने किसानों की समस्याओं को भी स्वीकार किया. बोले। मैं खुद स्वीकार करता हूं कि गन्ने की एक लाख लागत आने के बावजूद हम लोग उन्हें एक लाख 26 हजार रुपये के आसपास दे पा रहे हैं।
गन्ना मंत्री ने सपा विधायक के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि अन्य राज्यों से यूपी की तुलना नहीं की जा सकती। हरियाणा में एक साल के अंदर 63 लाख क्विंटल, पंजाब में 67 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई सालभर में होती है। लेकिन हमारे यहां (यूपी) एक मिल में ही डेढ़-डेढ़ करोड़ क्विंटल से ज्यादा गन्ने की पेराई हो जाती है। पिछले साल उत्तर प्रदेश में कुल 983 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई थी। ऐसे में यूपी की तुलना अन्य राज्यों से कैसे की जा सकती है।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस बार गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाएग। किसानों को पिछले वर्ष के बराबर ही गन्ना मूल्य मिलेगा. बीते दिनों कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिये सरकार ने गन्ना मूल्य 370 रुपए यथावत रखा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट शुरू होने से पहले कैबिनेट में प्रदेश के 10 प्रस्ताव को मंजूरी दी. यह प्रस्ताव योगी कैबिनेट ने बाई सर्कुलेशन में पास किया।
मुख्यमंत्री सीएम योगी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने देशभर में अपनी विशेष पहचान बनाई है। डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से कृषि निवेश योजनाओं का लाभ किसानों को सीधे मिल रहा है। सरकारी खरीद पोर्टल जेम (GEM) के माध्यम से खरीफ फसलों की रिकॉर्ड खरीद की गई है। प्रदेश गन्ना, खाद्यान्न, आम, दूध, आलू और चीनी उत्पादन में नंबर एक पर है। इसके अलावा, वृक्षारोपण अभियान में भी उत्तर प्रदेश पूरे देश में शीर्ष स्थान पर है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और कौशल विकास नीति को सफलतापूर्वक लागू किया है। इससे प्रदेश में शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। सरकार ने नए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थापना के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा को भी बढ़ावा दिया है, जिससे छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाया जा रहा है।