सूबे में योगी सरकार ने ऐसे किसानों को अस्सी प्रतिशत तक अनुदान देने का ऐलान किया है जो पराली जलाने की बजाय उससे खाद बनाएंगे। हालांकि सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ जुर्माना राशि भी तय कर दी है वहीं दोबारा यदि किसान पराली जलाने के मामले में दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ पुलिस की कार्रवाई भी होगी।
पराली प्रबंधन के रूप में किसानों को गौशाला में पराली भेजने को कहा गया है, जहां चारे के रूप में उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए किसानों को आर्थिक मदद भी मिलेगी।जबकि, पराली को सड़ाकर खाद बनाने वाले किसानों या लोगों को मशीनरी लागत में 80 फीसदी तक का अनुदान देने की घोषणा की है। इसके तहत कृषि यंत्र जैसे सुपर सीडर, स्ट्रा रीपर, मल्चर, पैडी स्ट्रा चापर आदि मशीनों की खरीद या यूनिट बनाने के लिए अनुदान मिलेगा।

पराली जलाने के कारण वायु प्रदूषण होता है और इससे बचने के लिए ही सरकार ने नया कदम उठाया है । हालांकि सरकार पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ भी सख्त है लेकिन अब सरकार नये तरीके से किसानों को वायु प्रदूषण रोकने की दिशा में अग्रसर करना चाहती है और यही कारण है कि सरकार ने पराली से खाद बनाने वाले किसानों को अस्सी प्रतिशत अनुदान देने का फैसला लिया है।
उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग के अनुसार पराली जलाने वाले किसानों पर 15000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जबकि, कई लाभदायक योजनाओं और रियायत से भी वंचित किया जा सकता है।
कृषि विभाग के अनुसार पराली जलाने के दोषी पाए जाने वाले किसानों को आर्थिक जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 2 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए 2500 रुपये जुर्माना तय किया गया है। जबकि, 2 से 5 एकड़ के लिए 5000 रुपये तक और 5 एकड़ से अधिक के लिए 15000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।दोबारा दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
