सदन में पूछे गए एक पश्न के उत्तर में आज, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सीजीडब्ल्यूबी द्वारा तैयार वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट-2024 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 29 जिलों के अलग-अलग हिस्सों में भूजल में निर्धारित सीमा से अधिक आर्सेनिक की मौजूदगी की जानकारी मिली है।
आज सदन में उठे एक सवाल का जवाब देते हुए, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में “भारत के गतिशील भूजल संसाधनों का राष्ट्रीय संकलन, 2024” नामक रिपोर्ट का हवाला दिया। चौधरी ने कहा कि देश में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 446.9 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) आंका गया है। कुल वार्षिक निकाले जाने योग्य भूजल संसाधन 406.19 बीसीएम आंका गया है और सभी उद्देश्यों (जैसे घरेलू, औद्योगिक, कृषि उपयोग आदि) के लिए कुल वार्षिक भूजल लगभग 245.64 बीसीएम निकाला गया है।
भूजल निकाले जाने का चरण (एसओई), जिसे पूरे देश के लिए वार्षिक निकाले जाने योग्य भूजल संसाधन पर वार्षिक भूजल निकालने के अनुपात के रूप में परिभाषित किया गया है, 60.47 फीसदी पर पहुंचा है। इसके अलावा देश में कुल 6746 मूल्यांकन इकाइयों (ब्लॉक/तालुका/मंडल) में से 4951 (73.39 फीसदी) इकाइयों को “सुरक्षित”, 711 इकाइयों (10.54 फीसदी) को “अर्ध-महत्वपूर्ण”, 206 इकाइयों (3.05फीसदी) को “महत्वपूर्ण”, 751 इकाइयों (11.13 फीसदी) को “अत्यधिक-शोषित” और शेष 127 मूल्यांकन इकाइयों (1.88 फीसदी) को “खारे पानी” की श्रेणी में रखा गया है।
भूजल प्राधिकरण (एसजीडब्ल्यूए) के दिशा-निर्देशों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) का प्रावधान न होने के कारण केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) ने राज्य भूजल प्राधिकरण को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा पांच के तहत पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) लगाने का निर्देश दिया है।
पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाते समय जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) द्वारा जारी नियमों का पालन करने की बात भी कही गई है। यह जुर्माना उन आवासीय परिसरों, कारखानों, व्यवसायों और अन्य पर लागू होगा, जो भूजल का अवैध रूप से दोहन कर रहे हैं।
बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 26 नवंबर, 2024 को दिए अपने आदेश में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को क्रिकेट स्टेडियमों के बारे में जानकारी एकत्र और व्यवस्थित करने का निर्देश दिया था। इसमें बोरवेल संबंधी विवरण जैसे उसकी स्थिति, अनुमति ली गई है या नहीं और कितना भूजल निकाला जा रहा है उसकी जानकारी शामिल करनी थी।
साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई थी कि क्या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) द्वारा साफ किए पानी का उपयोग किया जा रहा है या नहीं। साथ ही स्टेडियमों में बारिश के पानी को संजोने के लिए प्रणाली (आरडब्ल्यूएचएस) लगाई गई या नहीं। इतना ही नहीं अदालत ने भूजल के अवैध उपयोग के लिए लगाए गए जुर्माने के बारे में भी पूछा और यह भी जानकारी मांगी है कि क्या उसका भुगतान किया गया है या नहीं।