उत्तर प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को संगठित और आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में योगी सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की है। गोरखपुर के भटहट क्षेत्र के पिपरी गांव में 52 एकड़ भूमि पर निर्मित महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का लोकार्पण 1 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों द्वारा किया जाएगा।

इस विश्वविद्यालय की विशेषता यह है कि इसका शिलान्यास भी राष्ट्रपति स्तर पर ही हुआ था। 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आमंत्रण पर इसकी नींव रखी थी। अब यह संस्थान अपने पूर्ण रूप में राष्ट्र को समर्पित होने जा रहा है।

एकीकृत नियमन की दिशा में क्रांतिकारी कदम

इस विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी कॉलेजों का नियमन अलग-अलग संस्थाओं के माध्यम से होता था। लेकिन अब इन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का एकीकृत नियमन संभव हो सका है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और प्रबंधन में सुधार आया है।

वर्तमान में इस विश्वविद्यालय से 98 आयुष कॉलेज संबद्ध हैं, जिनमें 76 आयुर्वेद, 10 यूनानी और 12 होम्योपैथिक कॉलेज शामिल हैं। शैक्षिक सत्र 2021-22 से विश्वविद्यालय बीएएमएस, एमडी, एमएस (आयुर्वेद), बीयूएमएस, एमडी, एमएस (यूनानी), बीएचएमएस और एमडी (होम्योपैथी) पाठ्यक्रमों का संचालन और परीक्षा प्रणाली संभाल रहा है।

योगी सरकार के विजन का साकार रूप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर केंद्र सरकार ने आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी, योग एवं नेचुरोपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों को AYUSH के रूप में एकीकृत किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सोच को उत्तर प्रदेश में साकार करते हुए राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय की परिकल्पना की, जो अब धरातल पर उतर चुकी है।

भविष्य की दिशा और विस्तार की योजना

वर्तमान में विश्वविद्यालय में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक शिक्षा और चिकित्सा गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। आने वाले समय में इसमें योग, प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी), सिद्धा और सोया-रिग्वा जैसी विधाओं को भी जोड़ा जाएगा। इन क्षेत्रों की शिक्षा और चिकित्सा से जुड़ी कार्ययोजनाएं तैयार की जा रही हैं, जिससे विश्वविद्यालय एक समग्र आयुष शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित हो सके।