केंद्रीय कृषि मंत्री ने सोमवार को केंद्र और राज्य के अधिकारियों से आग्रह किया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत दिए गए धन सीधे लाभार्थियों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि कृषि तभी सफल होगी जब केंद्र और राज्य मिलकर काम करें और उन्होंने इस संबंध में सुझाव मांगे।
वार्षिक रबी सम्मेलन में बोलते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 700 किसानों का उदाहरण दिया, जिन्हें सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलने की बात कही गई थी। उन्होंने बताया, “शुरुआत में मुझे बताया गया कि सूची तैयार की जा रही है, लेकिन जब यह मेरे पास आई तो इसमें न पूरा नाम था, न पता और न ही कोई संपर्क नंबर। मैंने इस मामले को आगे बढ़ाया और विवरण प्राप्त किया। 700 किसानों में से 150 के संपर्क नंबर गलत या अमान्य थे और उनसे संपर्क नहीं हो पाया। हमारी टीम ने 500 किसानों से संपर्क किया, जिनमें से 158 ने कहा कि उन्हें कोई सब्सिडी नहीं मिली।”
दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन सोमवार को नई दिल्ली में शुरू हुआ। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि मंत्रालय ने छह मुख्य विषय तय किए हैं और प्रत्येक विषय पर अलग समूह चर्चा करेगा। ये विषय हैं: जलवायु-सहिष्णु कृषि, गुणवत्तापूर्ण इनपुट्स, कृषि व बागवानी फसलों का विविधीकरण, विस्तार सेवाएँ और उनकी भूमिका, तथा योजनाओं का समन्वय।
चौहान ने किसानों और वैज्ञानिकों की मेहनत की सराहना की और बताया कि देश ने कृषि में 3.7 प्रतिशत वृद्धि हासिल की है। उन्होंने नकली उर्वरक, बीज और कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और किसानों को जबरन अतिरिक्त उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने वाले रिटेलर्स और कंपनियों पर सवाल उठाया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौसम में अनिश्चितता के कारण अधिक से अधिक किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को सही ढंग से लागू करने पर जोर दिया और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए।
चौहान ने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से pest और crop disease के मामलों में सतर्क रहने की अपील भी की, क्योंकि कुछ राज्यों में सोयाबीन और धान की फसलों में बीमारी की रिपोर्ट मिली है।