प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने आकांक्षी कृषि जिलों की समीक्षा के लिए केंद्रीय नोडल अधिकारियों (CNOs) की नियुक्ति की है। यह पहली ऐसी पहल है जिसमें विशेष रूप से कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर केंद्रित समीक्षा तंत्र स्थापित किया गया है।

मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने इन केंद्रीय नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तथा कुछ स्थानों पर प्रतिस्थापन को मंजूरी दी है। ये अधिकारी योजनांतर्गत चिन्हित आकांक्षी कृषि जिलों में प्रगति की समीक्षा, परिणामों की मॉनिटरिंग और राज्य एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय की जिम्मेदारी निभाएंगे।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार यह निर्णय 3 अक्टूबर 2025 के पूर्व निर्देशों और उनके बाद किए गए संशोधनों के आधार पर लिया गया है। संशोधित नियुक्तियों का लक्ष्य योजना की निगरानी को सुदृढ़ करना और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई पिछले वर्ष इस योजना को 2025-26 से प्रारंभ होने वाले छह वर्षों के लिए स्वीकृति दी थी। योजना के अंतर्गत 100 जिलों को शामिल किया जाएगा। यह पहल नीति आयोग के आकांक्षी जिलों के कार्यक्रम से प्रेरित है।

योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता में वृद्धि, फसल विविधिकरण को बढ़ावा, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण क्षमता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं में सुधार तथा दीर्घकालिक और अल्पकालिक ऋण उपलब्धता को सुलभ बनाना है। योजना का क्रियान्वयन 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं के अभिसरण, राज्य योजनाओं तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से किया जाएगा।

इन जिलों का चयन कम उत्पादकता, कम फसल तीव्रता और कम ऋण वितरण जैसे तीन प्रमुख मानकों के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक राज्य से कम-से-कम एक जिला शामिल किया जाएगा। जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियाँ गठित की जाएंगी, जो योजना की योजना-प्रक्रिया, क्रियान्वयन और निगरानी सुनिश्चित करेंगी।

प्रत्येक जिले के लिए जिला कृषि एवं संबद्ध गतिविधि योजना तैयार की जाएगी, जिसे जिला धन धान्य समिति द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रगतिशील किसानों को भी इन समितियों में शामिल किया जाएगा। योजनाओं को फसल विविधिकरण, जल एवं मृदा संरक्षण, कृषि में आत्मनिर्भरता तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विस्तार जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ा जाएगा।

प्रत्येक धन-धान्य जिले की प्रगति की मासिक मॉनिटरिंग 117 प्रमुख प्रदर्शन सूचकों के डैशबोर्ड पर की जाएगी। नीति आयोग भी इन योजनाओं की समीक्षा और मार्गदर्शन करेगा। साथ ही नियुक्त केंद्रीय नोडल अधिकारी नियमित रूप से जिलों में प्रगति की समीक्षा करेंगे।

सरकार का मानना है कि इन 100 जिलों में लक्षित परिणाम बेहतर होने के साथ ही देश के समग्र कृषि प्रदर्शन संकेतक भी सुधरेंगे, जिससे उत्पादकता, मूल्य संवर्धन, स्थानीय रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी।