भारतीय सशस्त्र बलों की पहली ऑल-वुमन सेलिंग टीम अब दुनिया का चक्कर लगाने जा रही है। 10 महिला अधिकारी — जिनमें पाँच आर्मी, एक नेवी और चार एयरफोर्स की अधिकारी शामिल हैं — IASV त्रिवेणी पर 21,600 नौटिकल मील की ऐतिहासिक यात्रा पर निकलेंगी। यह अभियान 11 सितंबर से शुरू होगा और मई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

नारी शक्ति का प्रदर्शन

इस अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा वरुदकर कर रही हैं। 21 साल के सर्विस अनुभव वाली वरुदकर ने कहा, “यह मिशन तीनों सेनाओं के तालमेल का प्रतीक है। हम सभी अपने-अपने अनुभव और कौशल का उपयोग कर इस ऐतिहासिक अभियान को सफल बनाएंगे।”

स्क्वाड्रन लीडर श्रद्धा राजू, जो पहले सुकोई-30 विमान पर टेक्निकल ऑफिसर रही हैं, ने कहा, “हम IASV त्रिवेणी की अग्रदूत होंगी और भारतीय त्रि-सेवाओं की ताक़त को दुनिया के सामने पेश करेंगी।”

कठिन समुद्री रास्ते और चुनौतियाँ

इस यात्रा में टीम को दो बार भूमध्य रेखा (Equator) पार करनी होगी और तीन ग्रेट केप्स — ऑस्ट्रेलिया का केप ल्यूविन, साउथ अमेरिका का केप हॉर्न और साउथ अफ्रीका का केप ऑफ गुड होप — से गुजरना होगा।
नेवी प्रवक्ता कैप्टन मेहुल कार्निक के मुताबिक़, “सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा ड्रेक पैसेज होगा, जो खतरनाक समुद्री धाराओं और ऊँची लहरों के लिए जाना जाता है।”

लंबी तैयारी और आत्मनिर्भर भारत की झलक

इस टीम ने पिछले ढाई साल से लगातार प्रशिक्षण लिया है। इसमें नेविगेशन, कम्युनिकेशन, स्कूबा डाइविंग, बेसिक मेडिकल्स, फर्स्ट एड, संकट प्रबंधन, मौसम का अध्ययन और मैकेनिकल ट्रेनिंग शामिल रही।
IASV त्रिवेणी, पुदुचेरी में बनी 50 फुट लंबी स्वदेशी यॉट है, जो आत्मनिर्भर भारत की मिसाल है। यह पहले ही 10,000 नौटिकल मील की ट्रेनिंग यात्रा पूरी कर चुकी है।

राजनयिक रिश्तों को भी मज़बूती

यह अभियान 8-9 महीने चलेगा, जिसके दौरान टीम चार विदेशी बंदरगाहों — ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, अर्जेंटीना और साउथ अफ्रीका — पर रुकेगी और फिर मुंबई लौटेगी।
नेवल कंस्ट्रक्टर लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियांका गुसाईं ने कहा, “हम इस यात्रा के दौरान भारतीय प्रवासी समुदाय से भी मिलेंगे और कूटनीतिक रिश्तों को मज़बूत करेंगे।”