भारत ने अफ्रीकी देश अंगोला के साथ तेल, गैस और दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अंगोला यात्रा के पहले ही दिन दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें मत्स्य पालन, एक्वाकल्चर और समुद्री संसाधनों से जुड़े समझौते प्रमुख हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि “अंगोला भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है” और भारत की तेल एवं गैस कंपनियां दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंध (long-term contracts) करने की इच्छुक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत, अंगोला के पेट्रोलियम रिफाइनिंग और दुर्लभ खनिजों के अन्वेषण में सहयोग बढ़ाना चाहता है।

रक्षा सहयोग और औद्योगिक साझेदारी

राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि भारत अंगोला की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है, और भारत एक “विश्वसनीय रक्षा निर्यातक” के रूप में अंगोला को सहायता देगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने अंगोला को पहले से ही एक रक्षा लाइन ऑफ क्रेडिट (defence line of credit) दी है, जिसका कार्यान्वयन शीघ्र किया जाएगा।

डायमंड सेक्टर में नई संभावनाएं

अंगोला दुनिया के प्रमुख हीरा उत्पादक देशों में से एक है, जबकि भारत हीरा कटिंग और पॉलिशिंग का वैश्विक केंद्र है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा,

“हम अपने-अपने क्षेत्रों की ताकतों का उपयोग कर इस सेक्टर में परस्पर लाभकारी साझेदारी कर सकते हैं।”

परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग

भारत ने अंगोला की सड़क और परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की पेशकश की है। राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि भारत भविष्य में अंगोला को वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें भी उपलब्ध करा सकता है।

राजनयिक गर्मजोशी और स्वागत

रविवार को राष्ट्रपति मुर्मू का अंगोला के राष्ट्रपति जोआओ लोरेन्सो (João Lourenço) ने 21 तोपों की सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ स्वागत किया। इस मौके पर दोनों देशों के बीच मत्स्य, समुद्री संसाधन और कांसुलर सहयोग से जुड़े समझौते भी हस्ताक्षरित हुए।