धारवाड़ स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएएस) द्वारा आयोजित चार दिवसीय कृषि मेला मंगलवार शाम को संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय के अनुसार, इस बार मेले में कुल 23.74 लाख लोगों ने शिरकत की, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।

विश्वविद्यालय ने बताया कि फुटफॉल रिकॉर्ड करने के लिए इस बार एआई कैमरे लगाए गए थे। साथ ही, क्यूआर कोड और स्पॉट रजिस्ट्रेशन को मिलाकर यह आंकड़ा तय किया गया।

डेटा के अनुसार, 13 सितंबर को पहले दिन 3.65 लाख लोग पहुंचे। रविवार को मेले में 7.74 लाख की भारी भीड़ रही। सोमवार को, जब मुख्यमंत्री सिद्दरामैया ने औपचारिक रूप से कार्यक्रम का उद्घाटन किया और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया, तब 8.60 लाख लोगों की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी। मंगलवार को समापन दिवस पर 3.75 लाख लोग मेले में आए।

बीज बिक्री में किसानों की बड़ी भागीदारी

किसानों के बीच लोकप्रिय यह वार्षिक कृषि मेला खरीफ और रबी सीजन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज खरीदने का बड़ा अवसर होता है। इस वर्ष मेले के दौरान 1,141.2 क्विंटल रबी बीज और 245 किलोग्राम सब्जी बीज बेचे गए। कुल मिलाकर, बीजों की बिक्री से ₹1.01 करोड़ की आमदनी हुई। साथ ही, विश्वविद्यालय ने अपनी प्रकाशन सामग्री ₹2 लाख में बेची।

प्रगतिशील किसानों की प्रेरक कहानियां

समापन दिवस पर प्रगतिशील किसानों की सफलता की कहानियों को साझा करने के लिए एक प्रेरणादायक सत्र आयोजित किया गया।
धारवाड़ जिले के शौकतअली एच. लांबूणावर और शिवलीला एस. हिट्टलमणि, बेलगावी जिले की रेणुका एम. भोजन्नावर, हावेरी जिले की बसम्मा पी. चन्नूर और शिवानंद मंगन्नावर ने अपने अनुभव साझा किए।

समारोह में फलों और फूलों की प्रदर्शनी के विजेताओं सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

‘किसान महाकुंभ मेला’ बना आकर्षण का केंद्र

समापन समारोह के मुख्य अतिथि सीजीएम, नाबार्ड बेंगलुरु, सुरेंद्र बाबू ने इस चार दिवसीय कार्यक्रम को “किसान महाकुंभ मेला” करार दिया। उन्होंने किसानों की उपज के विपणन के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति पी.एल. पाटिल ने कहा कि “मृदा स्वास्थ्य और पौष्टिक खाद्य सुरक्षा के लिए पारंपरिक किस्में” विषय पर आयोजित इस कृषि मेले ने पारंपरिक किस्मों के महत्व को रेखांकित किया, जिससे लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो सके और मिट्टी की सेहत भी बनी रहे।

समापन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के निदेशक, डीन और वरिष्ठ संकाय सदस्य भी उपस्थित थे।