लुधियाना जिले के धुलकोट गांव की 68 वर्षीय हरजिंदर कौर आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। उम्र को चुनौती देती हरजिंदर अपने आंगन में मुर्गियां, शुतुरमुर्ग, भैंसें और अब बकरियां पालकर आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा गढ़ रही हैं।

वर्तमान में उनके पास 11 मुर्गियां, 6 काले शुतुरमुर्ग और 5 भैंसें हैं। हाल ही में उन्होंने दो बकरियां खरीदी हैं और जल्द ही बकरियों का एक छोटा फार्म विकसित करने की योजना है।

उनका बेटा, जो कनाडा में रहता है, हाल ही में उन्हें कोलंबियन ब्रह्मा नस्ल की मुर्गियां उपहार में लाया। अपने मुलायम पंखों और खूबसूरत कद-काठी के कारण ये मुर्गियां गांवभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। लोग उन्हें देखने खासतौर पर आते हैं।

हरजिंदर कौर न केवल अंडे बेचकर आमदनी करती हैं, बल्कि शुतुरमुर्ग और मुर्गियों के अंडे पोषण और स्वाद के लिए भी मशहूर हो रहे हैं।

बिना किसी औपचारिक व्यावसायिक पृष्ठभूमि के बावजूद हरजिंदर लगातार अपनी जानकारी को बढ़ा रही हैं। वह समय-समय पर गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (GADVASU) के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर नई तकनीकें सीखती हैं।

उनकी लगन और मेहनत से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं। कई महिलाएं अब उनके घर आकर पशुपालन के बारे में सीख रही हैं और इसे आजीविका का साधन बनाने पर विचार कर रही हैं।

हरजिंदर का कहना है, “मैं 68 साल की हूं, लेकिन मेरा हौसला मेरी उम्र से कहीं ज्यादा जवान है। उम्र हाथों को काम करने और दिमाग को सपने देखने से नहीं रोकती। हर महिला को आत्मनिर्भर होना चाहिए, क्योंकि यह गर्व, शांति और शक्ति देता है।”