पहाड़ पर बर्फबारी और उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में भले ही हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ रही है लेकिन उत्तराखंड के निकाय चुनाव में चुनाव चिन्ह के लिए इस बार केतली और गैस सिलेंडर के लिए भारी मांग है।

मिली जानकारी अनुसार दरअसल, नगर निगम में 200 के करीब निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। सभी 100 वार्डों में इन प्रत्याशियों में पटार्च, कांच का गिलास, छत का पंखा, छत का पंखा, केतली , वायुयान, घंटी की मांग रही।

जांच में नामांकन रद्द होने से कांग्रेस के कई प्रत्याशियों की चुनाव लड़ने पहले ही उम्मीदों की नाव डूब गई। अब पार्टी उन चेहरों पर दांव लगाने की जुगत में है, जिन्होंने निर्दलीय पर्चा भरा है और भाजपा को तगड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।

देहरादून नगर निगम समेत कई निकायों में टिकट न मिलने से नाराज होकर प्रत्याशियों ने नामांकनपत्र भरे थे। बृहस्पतिवार को नाम वापसी का दिन था। लिहाजा, कांग्रेस के कई कद्दावर नेता प्रत्याशियों के हक में नामांकन वापसी की कोशिशों में जुटे रहे। किसी को दिलासा दिया गया तो किसी को अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी।

नामांकन वापसी के दौरान कांग्रेस के बड़े नेता बृहस्पतिवार को दिनभर डैमेज कंट्रोल में जुटे रहे। देहरादून समेत कई निकायों में प्रत्याशियों ने अपने नामांकन वापस भी ले लिए। वहीं, जिन निकायों में कांग्रेस प्रत्याशियों के नामांकन रद्द हुए हैं, उनके लिए विशेष योजना बनाई गई है।

दिनभर में कई निकायों में प्रत्याशियों ने अपने नामांकन वापस भी लिए। अब कांग्रेस ने उन निकायों और वार्डों पर फोकस बढ़ा दिया है, जहां आपत्ति के बाद उनके नामांकन रद्द हो गए हैं। मंगलौर, हरर्बटपुर समेत इन सभी निकायों में अब कांग्रेस के नेता निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर देख रहे हैं।