कुपोषण से लड़ने और बच्चों को स्वस्थ आहार की ओर प्रेरित करने की दिशा में श्योपुर जिले में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा की पहल पर आदिवासी विकासखण्ड कराहल के ग्राम पारोंद स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों को मोटे अनाज से बने पौष्टिक लड्डुओं का वितरण किया गया।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के नीति आयोग के अंतर्गत संचालित आकांक्षी विकासखण्ड कार्यक्रम के तहत आयोजित जन-जागरूकता अभियान का हिस्सा था। कार्यक्रम में समन्वयक सुश्री दीपांशी जादौन ने महिलाओं को मोटे अनाज के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि ज्वार, बाजरा और मक्का ही प्रमुख मिलेट्स हैं, जो पोषण से भरपूर होते हैं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।
स्थानीय फसलों से पोषण की पहल
उन्होंने बताया कि आदिवासी विकासखण्ड कराहल में ज्वार, बाजरा और मक्का प्रमुख फसलें हैं, जो लगभग हर घर में उपलब्ध हैं। ऐसे में बच्चों के संतुलित पोषण के लिए इन्हीं अनाजों से बने व्यंजन अपनाना आसान और उपयोगी है।
कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा की पहल पर जन-जागरूकता कार्यक्रम के दौरान मिलेट्स से बने लड्डू बच्चों और उनके अभिभावकों को वितरित किए गए, साथ ही इन्हें घर पर तैयार करने की विधि भी समझाई गई।
मोटे अनाज आज के दौर का सुपरफूड
कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी सेवा आश्रम से श्रीमती ज्योति रजक एवं श्री नीरज श्रीवास्तव ने गांव की माताओं के साथ संवाद किया। उन्होंने बताया कि कोदो, कुटकी, रागी और ज्वार केवल पारंपरिक भोजन नहीं, बल्कि आज के समय के सुपरफूड हैं।
इन अनाजों में मौजूद प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
नई रेसिपी से बढ़ेगा बच्चों का स्वाद
सत्र के दौरान पारंपरिक मोटे अनाज से बनने वाली नई और स्वादिष्ट रेसिपियों पर भी चर्चा की गई। माताओं को बताया गया कि वे घर पर
- रागी से बिस्किट और चंदिया,
- कोदो की पौष्टिक खीर,
- बाजरे की खिचड़ी और लड्डू
आसानी से तैयार कर सकती हैं।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि यदि भोजन स्वादिष्ट होगा, तो बच्चे उसे रुचि से खाएंगे और उन्हें पूरा पोषण भी मिलेगा।