तमिलनाडु में वर्ल्ड बैंक की सहायता से चल रही ‘तमिलनाडु सिंचित कृषि आधुनिकीकरण परियोजना’ (TNIAMP) ने राज्य की कृषि व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। वर्ष 2017 में शुरू हुई इस परियोजना ने अब तक 34 जिलों के 16 लाख से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाया है।

इस परियोजना की कुल लागत ₹2,961 करोड़ है, जिसमें 30% भागीदारी राज्य सरकार की रही है। परियोजना को राज्य के 47 नदी उप-घाटियों में लागू किया गया है और इसका उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति किसानों की क्षमता को सुदृढ़ करना है।

सरकारी बयान के अनुसार, इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 2,626 तालाबों, 355 चेक डैम्स और 5,000 किलोमीटर से अधिक नहरों का पुनर्वास किया जा चुका है।

उन्नत सिंचाई तकनीकों जैसे ‘सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन’ (SRI) और ‘अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग’ (AWD) को अपनाकर जल उपयोग क्षमता में सुधार किया गया है और मीथेन उत्सर्जन में 40% तक की कमी लाई गई है। इसके अलावा, 13,047 हेक्टेयर भूमि पर ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली लागू की गई है, जिससे 48% तक जल की बचत और 30% तक खेती की लागत में कमी आई है।

इस परियोजना को कृषि, बागवानी और पांच अन्य विभागों व तीन विश्वविद्यालयों के संयुक्त प्रयास से लागू किया गया है, जिसका फोकस सतत विकास पर है।

परियोजना ने बाजार से जुड़ाव को भी सशक्त किया है, जिसके अंतर्गत 41,000 मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का संग्रहण कर ₹94.95 करोड़ का व्यापार सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही सतत मत्स्य पालन और पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

इस उपलब्धि के लिए तमिलनाडु को ‘इंटीग्रेटेड वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट में उत्कृष्टता – 2024’ का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।