बिलासपुर के मल्हार क्षेत्र के प्रगतिशील किसान जदूनंदन प्रसाद वर्मा ने अपनी एक एकड़ जमीन में कुम्हड़ा की फसल उगाई है। उन्होंने न तो रासायनिक खाद डाली और न ही खेत की जुताई की। इसके बजाय पिछली फसल के अवशेष खेत में ही छोड़ दिए, जिससे मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ गई। परिणामस्वरूप, कुम्हड़ा की फसल न सिर्फ तेजी से बढ़ रही है, बल्कि खेतों में फल भी लटकने लगे हैं।
जीरो लागत, बंपर मुनाफा
इस तकनीक से खेती की लागत पूरी तरह शून्य हो गई और अब किसान वर्मा को उम्मीद है कि उन्हें लाखों रुपये की आमदनी होगी।
🌱 किसानों के लिए रोल मॉडल
बिलासपुर के किसान वर्मा की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि बिना रासायनिक खाद और जुताई के भी शानदार उत्पादन संभव है। यह मॉडल छोटे और मध्यम किसानों के लिए आर्थिक रूप से एक गेम चेंजर बन सकता है।