बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती का 15 जनवरी का जन्मदिन इस बार सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में पार्टी के लिए नई राजनीतिक रणनीति की शुरुआत का प्रतीक होगा। बसपा ने इस अवसर पर ‘मिशन 2027’ की घोषणा करने की तैयारी की है, जिसमें अगले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को मजबूत करने और खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने की कवायद शामिल है।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती का 15 जनवरी का जन्मदिन इस बार सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में पार्टी के लिए नई राजनीतिक रणनीति की शुरुआत का प्रतीक होगा। बसपा ने इस अवसर पर ‘मिशन 2027’ की घोषणा करने की तैयारी की है, जिसमें अगले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को मजबूत करने और खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने की कवायद शामिल है।
बसपा के ‘मिशन 2027’ के केंद्र में पार्टी के उन पुराने और अनुभवी चेहरों की वापसी है, जिन्होंने कभी बसपा को उत्तर प्रदेश की सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही, बामसेफ (बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी कम्युनिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन) को भी फिर से सक्रिय करने की योजना बनाई जा रही है। बामसेफ को बसपा का वैचारिक आधार माना जाता है, और इसकी सक्रियता पार्टी की सामाजिक इंजीनियरिंग को नई धार देने में सहायक हो सकती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2012 के बाद से लगातार कमजोर हो रही बसपा अब अपनी खोई हुई जमीन तलाशने में जुट गई है। पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया था। ‘मिशन 2027’ के तहत पार्टी दलित, ओबीसी और मुस्लिम समुदाय को फिर से अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेगी।
मिशन 2027 की रणनीति
संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन: बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए नए कार्यकर्ताओं की भर्ती की जाएगी।
समाज के सभी वर्गों को साधने की कोशिश: दलित, ओबीसी और मुस्लिम समुदाय के अलावा सवर्ण समाज को भी पार्टी के साथ जोड़ने की योजना बनाई गई है।
प्रचार तंत्र को मजबूत बनाना: सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पार्टी की सक्रियता बढ़ाई जाएगी।
क्षेत्रीय नेताओं की भागीदारी: क्षेत्रीय नेताओं को अधिक जिम्मेदारी देकर पार्टी के वोट बैंक को मजबूत करना।