मदुरै और रामनाथपुरम, थेनी, शिवगंगा जैसे आस-पास के जिलों में मक्का की खेती करने वाले किसानों को इस साल फ़ॉल आर्मीवर्म ( स्पोडोप्टेरा फ्रूजीपरडा) (जेस्मिथ) नामक एक आक्रामक कीट के हमले के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अकेले मदुरै जिले में अनुमानित 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र इस कीट के कारण प्रभावित हुआ है।

वैसे तो यह आक्रामक कीट मूल रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका का है, लेकिन इसे पहली बार भारत में 2018 में तमिलनाडु और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों में देखा गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह कीट मदुरै, इरोड, करूर, सलेम, डिंडीगुल, विल्लुपुरम और शिवगंगा जिलों में व्यापक रूप से देखा जाता है।

कृषि महाविद्यालय एवं शोध संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर (कीट विज्ञान) के. सुरेश ने कीट की प्रकृति को बहुभक्षी (कई प्रकार के भोजन को खाने वाले या उपयोग करने वाले) बताया है, जो कई आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फसलों जैसे मक्का, ज्वार, गन्ना, चावल, गेहूं, लोबिया, मूंगफली, कपास आदि पर हमला करते हैं।

मदुरै जिले में अच्छी और मौसमी वर्षा के कारण पिछले दो वर्षों से यह कीट निष्क्रिय था, तथा इस वर्ष बेमौसम और कम वर्षा के कारण यह पुनः सक्रिय हो गया।

मदुरै जिले के रेत्रापट्टी गांव में मक्का की फसल फॉल आर्मीवर्म से प्रभावित हुई।

जिले के 13 ब्लॉकों में से, आठ जिलों – वाडीपट्टी, अलंगनल्लूर, तिरुमंगलम, कल्लिकुडी, टी. कल्लुपट्टी, उसिलामपट्टी, चेलमपट्टी और सेदापट्टी में मक्का की फसल की खेती का 22,400 हेक्टेयर क्षेत्र दर्ज किया गया है।

जबकि, सेदापट्टी ब्लॉक में सबसे अधिक 10,553 हेक्टेयर, टी. कल्लुपट्टी ब्लॉक में 7,449 हेक्टेयर, तिरुमंगलम ब्लॉक में 3,873 हेक्टेयर, कल्लिकुडी ब्लॉक में 250 हेक्टेयर, चेल्लमपट्टी ब्लॉक में 122 हेक्टेयर, उसीलमपट्टी ब्लॉक में 72 हेक्टेयर, अलंगनल्लूर ब्लॉक में 64 हेक्टेयर और वाडीपट्टी ब्लॉक में 17 हेक्टेयर में मक्का की फसल की खेती होती है।