तेलंगाना ने भारत के कृषि क्षेत्र को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PJTSAU) में देश की पहली एग्री-रोबोटिक्स आईओटी सॉल्यूशंस फॉर एग्रीकल्चर (ARISA) लैब का उद्घाटन किया गया है। यह लैब आईआईटी हैदराबाद, बिट्स पिलानी और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से स्थापित की गई है और इसका उद्देश्य स्मार्ट फार्मिंग को बढ़ावा देना है।
ARISA लैब भारतीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार स्वायत्त रोबोटिक सिस्टम विकसित करेगी, जो खासतौर पर खरपतवार नियंत्रण, कटाई और डिजिटल सॉयल मैनेजमेंट जैसे कार्यों को स्वचालित रूप से अंजाम देंगे। विश्वविद्यालय ने एक वर्ष के भीतर पहला खुदाई और कटाई रोबोट पेश करने की योजना बनाई है।
PJTSAU के अधिकारियों ने बताया कि कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की भारी कमी और किसानों की औसत आयु 60 वर्ष से अधिक होने के कारण इस तरह की तकनीकों की आवश्यकता बढ़ गई है। युवाओं का रुझान पारंपरिक खेती से दूर होता जा रहा है, इसलिए उन्नत उपकरणों का विकास आवश्यक है ताकि कृषि उत्पादकता और निरंतरता बनी रह सके।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से मिले ₹12 करोड़ के वित्तीय सहयोग से यह लैब PJTSAU के सेंटर फॉर डिजिटल एग्रीकल्चर के तहत कार्य करेगी। इस सेंटर को दक्षिण भारत में एग्रीटेक इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
लैब में रोबोटिक्स के साथ-साथ तीन विशेष प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जाएंगी जो कृषि में उभरती तकनीकों पर काम करेंगी। इनमें से एक ड्रोन लैब है, जिसे तेलंगाना ड्रोन अकादमी के सहयोग से विकसित किया गया है। यहां किसानों को ड्रोन संचालन और सटीक स्प्रेइंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे कीटनाशकों और उर्वरकों के बेहतर इस्तेमाल के साथ-साथ किसानों की रासायनिक संपर्क से सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
भारत सरकार जहां किसानों की आय दोगुनी करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, वहीं तेलंगाना की यह पहल पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है। अगर इस तरह की डिजिटल पहलों को व्यापक रूप से लागू किया गया, तो यह भारतीय किसानों की भूमिका को पूरी तरह से बदल सकती है—जहां मेहनत से ज्यादा तकनीक पर आधारित सटीक खेती होगी।