डीबीडब्ल्यू 187 (करण वंदना): मध्य और पूर्वी यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों के मैदानी इलाकों का मौसम इसके लिए अच्छा है| इस किस्म की उपज 48.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है|
भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान , करनाल ने देश के कई राज्यों के लिए गेहूं की कई उच्च उपज वाली किस्में विकसित की हैं. खास बात यह है कि भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित की गईं किस्में रोग प्रतिरोधी हैं. इसकी वजह से हरियाणा, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित कई राज्यों में पहले के अपेक्षा गेहूं की उपज पढ़ गई है. साथ ही रोग प्रतिरोधी होने की वजह से फसलों की मौसमी बीमारियों से बर्बादी भी कम हो रही है|
गेहूं एक ऐसी फसल है, जिसकी खेती लगभग पूरे भारत में की जाती है| लेकिन इसके लिए ठण्ड का मौसम ही उपयुक्त माना गया है| साथ ही गेहूं की खेती सभी प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है| वहीं, ड्यूरम गेहूं बोने के लिए भुरभुरी मिट्टी अच्छी मानी गई है| मध्य प्रदेश में लगभग 1.0-1.2 मिलियन टन ड्यूरम गेहूं का उत्पादन भी किया जाता है|
डीबीडब्ल्यू 187 (करण वंदना): मध्य और पूर्वी यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों के मैदानी इलाकों का मौसम इसके लिए अच्छा है| इस किस्म की उपज 48.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है, जबकि संभावित उपज – 64.7कि/ हे/ha माना गया है| पौधे की ऊंचाई 100 सेमी होती है| वहीं, 118-124 दिन में इसकी फसल पक कर तैयार हो जाती है|
डीबीडब्ल्यू 222 (करण नरेंद्र): इस किस्म की खेती पूरे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर संभाग को छोड़कर) और पश्चिमी यूपी में की जाती है| इसके अलावा भी कई राज्यों में इसे उगाया जाता है| अगर इसकी विशेषता की बात करें तो इसके पौधे की ऊंचाई 108 सेंटीमीटर तक हो सकती है| यह 140 से 150 दिन के अंदर पक जाता है| इसके बाद इसकी कटाई की जा सकती है|
डीबीडब्ल्यू187 (करण वंदना): पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर डिवीजनों को छोड़कर) और पश्चिमी यूपी सहित कई राज्यों का मौसम इसके लिए अनुकूल माना गया है| एक हेक्टेयर में 61.3 क्विंटल गेहूं की उपज होती है| इसकी संभावित उपज 96.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर माना गया है| पौधे की ऊंचाई 105 सेमी तक हो सकती है| 94 से 103 दिन के अंदर पौधों में दाने आ जाते हैं| वहीं, 139-157 दिन में काटने लायक हो जाता है|
डीबीडब्ल्यू 187 (करण वंदना): मध्य और पूर्वी यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों के मैदानी इलाकों का मौसम इसके लिए अच्छा है| इस किस्म की उपज 48.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है, जबकि संभावित उपज – 64.7q/ha माना गया है| पौधे की ऊंचाई 100 सेमी होती है| वहीं, 118-124 दिन में इसकी फसल पक कर तैयार हो जाती है|